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रूस के साथ बिजनेस जारी रखने की राह में ये रोड़ा, थोड़ी और देरी होने पर भारत को होगा फायदा!

भारत रुपये में रूस के साथ बिजनेस जारी रखने की कोशिशों में लगा है. हालांकि, अभी तक एक्सचेंज रेट तय नहीं हो सका है. सेंट्रल बैंकों को यह काम पूरा करना है लेकिन सरकार के साथ विचार-विमर्श के बिना ऐसा करना मुमकिन नहीं हो पाएगा.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रूस के रूबल में आई भारी गिरावट
  • रूबल के और गिरने पर भारत को होगा फायदा

Indo-Russia Trade: रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लागू किए जाने के बाद भारत अपने पुराने सहयोगी के साथ कारोबार जारी रखने को लेकर रास्ता निकालने में लगा है. दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में कारोबार (India-Russia Trade) के लिए रुपये और रूबल (Russian Ruble) के बीच एक्सचेंज रेट (India-Ruble Exchange Rate) का निर्धारण अहम है. दोनों देशों के केंद्रीय बैंक अपनी-अपनी सरकारों के साथ विचार-विमर्श के बाद एक्सचेंज रेट तय करने का काम करेंगे. हालांकि. इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा वैल्यूएशन का है. 

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वैल्यूएशन है सबसे बड़ी समस्या

ग्लोबल करेंसी एक्सपर्ट अभिजीत अवस्थी कहते हैं, "सभी ग्लोबल करेंसी की कोडिंग केवल डॉलर में होती है. अगर किसी भी तरह से डॉलर-रूबल का रेट नहीं निकाला जा सकता है तो रुपये-रूबल का रेट निकालने का भी कोई तरीका नहीं है. ऐसे में यह केवल सेटलमेंट से जुड़ा मुद्दा नहीं रह जाता है बल्कि वैल्यूएशन का सवाल बन जाता है. सवाल यह हो जाता है कि रूबल की सही कीमत क्या है, जिसके आधार पर कंवर्जन किया जाना चाहिए."

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अकेले रूबल-रुपये का एक्सचेंज रेट तय नहीं कर सकता है. केंद्रीय बैंक को एक्सचेंज रेट तय करने के लिए सरकार से विचार-विमर्श करना होगा. 

रूस के रूबल में आई भारी गिरावट

यूक्रेन संकट के सामने आने के बाद से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रूस की मुद्रा रूबल में काफी गिरावट आ चुकी है. वहीं, इस दौरान भारतीय करेंसी में बिल्कुल मार्जिनल गिरावट देखने को मिली है. आने वाले दिनों में रूबल में और गिरावट की पूरी आशंका है. 

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रूबल के और गिरने पर भारत को होगा फायदा

भारत शुद्ध आधार पर इम्पोर्टर है. ऐसे में अगर आने वाले समय में रूबल में और अधिक गिरावट आती है तो भारत को फायदा होगा. दरअसल, रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों और रूस के बैंकों के लिए इंटरनेशनल पेमेंट मैसेजिंग सिस्टम स्विफ्ट (SWIFT) को डिसकनेक्ट किए जाने के बाद भारत अपने लंबे समय के सहयोगी रूस के साथ द्विपक्षीय कारोबार (Bilateral Trade) और रुपये-रूबल में पेमेंट की संभावनाएं तलाश रहा है.

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