यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग (Ukraine-Russia War) का असर अब इंडस्ट्रीज के ऊपर पड़ने लगा है. कई सेक्टर अब सीधे तौर पर इस जंग से प्रभावित होने लगे हैं. एयरलाइन सेक्टर (Airline Sector) उन इंडस्ट्रीज में है, जो सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. कई देशों ने रूस के विमानों के लिए अपना आसमान बंद कर दिया है और इसके बदले में रूस ने भी इसी तरह का बैन लगाया है. इससे अब विमानों को सफर पूरा करने के लिए लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है.
कनाडा, ईयू के बाद अमेरिका का भी बैन
यूक्रेन पर रूस के हमले के विरोध में सबसे पहले कनाडा (Canada) और यूरोपीय संघ (EU) ने एयरस्पेस बैन का ऐलान किया. इसके बाद आज अमेरिका ने भी रूस के विमानों के लिए अपना आसमान बंद कर दिया. यह बैन रशियन एयरलाइंस के साथ ही रूस के अमीर लोगों के प्राइवेट प्लेन्स पर भी लागू होगा. इसी तरह कार्गो विमानों के लिए भी यह बैन प्रभावी होगा. अमेरिका ने अपने एयरस्पेस में मौजूद रूसी विमानों को 24 घंटे के अंदर निकल जाने को कहा है.
रूस को होगा इतना घाटा
एनालिस्ट का मानना है कि अमेरिका के इस बैन से रूस पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है. इसका कारण है कि यूरोप और कनाडा का आसमान बंद होने के बाद रूस के लिए पहले ही अमेरिका के रास्ते बंद हो चुके थे. हालांकि अमेरिका के इस कदम के बाद आशंका है कि रूस भी सिमिलर बैन का ऐलान करे. रूस को अपना एयरस्पेस बंद करने से जरूर घाटा होने वाला है. रूस अपने एयरस्पेस और एयरपोर्ट के लीज से अच्छी-खासी कमाई करता है. रूस पहले ही यूरोप के विमानों के लिए अपने रास्ते बंद कर चुका है. टाइम की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एयरलाइंस फेडएक्स और यूपीएस दोनों के कार्गो विमान रूस के आसमान से होकर गुजरा करते हैं. स्थिति खराब होने पर दोनों कंपनियां अपनी कार्गो उड़ानों को निलंबित कर चुकी हैं.
भारत की इस उड़ान पर भी असर
रूसी एयरस्पेस बंद होने से भारत-अमेरिका की उड़ानों पर भी असर होने वाला है. अमेरिकन एयरलाइंस की नई दिल्ली-न्यूयॉर्क फ्लाइट रूस के आसमान से होकर गुजरती है. अब इस फ्लाइट को रूट बदलना होगा और ज्यादा दूरी तय करनी होगी. रूट की लंबाई कई मील बढ़ जाने से अब इस फ्लाइट को बीच में रुककर ईंधन भी भरवाना पड़ेगा. इसका मतलब हुआ कि न सिर्फ फ्लाइट का समय बढ़ेगा बल्कि अब किराया भी बढ़ जाएगा.
यूरोप के सामने अब ये खतरा
रूस का एयरस्पेस बंद होने से यूरोप को ज्यादा दिक्कत होने वाली है. रिपोर्ट में एविएशन डेटा फर्म सिरियम के के हवाले से बताया गया है यूरोप आने-जाने वाली करीब 600 उड़ानें रूस का आसमान इस्तेमाल करती हैं. अब इन्हें रूस का एयरस्पेस अवॉयड करने के लिए रूट बदलना होगा, जिससे दूरी सैकड़ों मील बढ़ जाने वाली है. रूस भी इससे काफी प्रभावित होने वाला है, क्योंकि रूस और यूरोपीय यूनियन के बीच करीब 70 फीसदी उड़ानें रूसी कंपनियों की होती हैं.
ग्लोबल सप्लाई चेन में होगा डिसरप्शन
एयरस्पेस बैन से सबसे बुरा असर कार्गो पर होने वाला है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप और जापान, चीन, दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई एक्सपोर्टर के बीच होने वाला ट्रेड सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, क्योंकि इनकी उड़ानें साइबेरिया के ऊपर से गुजरती हैं, जो अब बंद हो चुका है. रूसी विमानें भी अब कार्गो नहीं ढो पाएंगी, क्योंकि उनके लिए यूरोप के रास्ते बंद हैं. जर्मनी की लुफ्थांसा, फ्रांस की एअर फ्रांस केएलएम, फिन एअर और वर्जिन अटलांटिक जैसी यूरोपीय कंपनियां पहले ही सारे नॉर्थ एशियन फ्लाइट कैंसल कर चुकी हैं. अभी एशियाई एयरलाइंस और मिडल ईस्टर्न एयरलाइंस ही बिना रोक के उड़ान भर सकती हैं.