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जेल गए-शादी टूटी, पर फिर भी नहीं मानी हार; 41 साल की उम्र में इस शख्स ने खड़ा किया सफल स्टार्टअप  

ड्रूम (Droom) जैसे सफल स्टार्टअप के फाउंडर संदीप अग्रवाल (Sandeep Aggarwal) इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में अमेरिका में एफबीआई द्वारा गिरफ्तार हुए थे. उनकी पत्नी एवं पार्टनर से उनका झगड़ा और तलाक हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

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ड्रूम के फाउंडर संदीप अग्रवाल (फोटो: sandeepaggarwal.com)
ड्रूम के फाउंडर संदीप अग्रवाल (फोटो: sandeepaggarwal.com)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • संदीप अग्रवाल की कहानी जीवटता की
  • हार न मानने वाले सीरियल आंत्रप्रेन्योर

शॉपक्लूज (ShopClues) और ड्रूम (Droom) जैसे सफल स्टार्टअप के फाउंडर संदीप अग्रवाल (Sandeep Aggarwal) की कहानी से किसी को भी प्रेरणा मिल सकती है. संदीप अग्रवाल इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में अमेरिका में एफबीआई द्वारा गिरफ्तार हुए थे और कुछ महीने जेल में रहे. उनकी पत्नी एवं पार्टनर राध‍िका से उनका अनबन और तलाक हुआ जिसके बाद उनका पहला स्टार्टअप बिक गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने 41 साल की उम्र में एक नया स्टार्टअप Droom खड़ा किया जो आज यूनिकॉर्न बन चुका है. 

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Unicorn (यूनिकॉर्न) उन स्टार्टअप को कहते हैं जिनका वैल्यूएशन एक अरब डॉलर (करीब  7500 करोड़ रुपये) के पार हो जाता है. आज संदीप द्वारा स्थापित स्टार्टअप Droom भारत में यूज्ड गाड़‍ियों की खरीद-फरोख्त के लिए एक जाना-पहचाना नाम बन चुका है. 

उतार-चढ़ाव वाला जीवन 

संदीप अमेरिका के वाल स्ट्रीट में एनालिस्ट थे और बाद में टेक आंत्रप्रेन्योर बने. उन्हें भारत में दो सफल यूनिकॉर्न स्टार्टअप खड़ी करने के लिए जाना जाता है. उनकी इस यात्रा में काफी उतार-चढ़ाव, मान-अपमान, भावनात्मक संघर्ष, विफलता, पारिवारिक संकट, विफलताएं सबकुछ है. वे ऐसे सफल सीरियल आंत्रप्रेन्योर हैं जो हालात कितने भी विपरीत हों हार नहीं मानता. 

ऐसे हुई शुरुआत

अग्रवाल ने साल 2011 में अपनी पत्नी और एक दोस्त के साथ मिलकर अमेरिका और भारत में ई-कॉमर्स कंपनी ShopClues की स्थापना की. यह कंपनी काफी सफल रही और यूनिकॉर्न बनी, लेकिन बाद में पत्नी एवं बिजनेस पार्टनर राध‍िका से अनबन के चलते उन्होंने इस कारोबार से बाहर जाना पड़ा और यह कंपनी बिक गई. राध‍िका से उनके रिश्ते टूट गए. 

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साल 2013 में एक इनसाइडर ट्रेडिंग के कथित मामले में उन पर अमेरिका में मुकदमा चलाया गया और वह जेल भी गए. इसकी वजह से ही उन्हें ShopClues के सीईओ पद से इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि कुछ ही महीनों बाद वह रिहा हो गए और उनके ऊपर से सारे आरोप वापस ले लिए गए. 

हार नहीं मानी 

इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. साल 2014 में उन्होंने ऑटोमोबाइल के लिए एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस Droom (droom.in) की शुरुआत की जो अब एक यूनिकॉर्न में बदल चुका है. 

संदीप अब करीब 48 साल के हैं. संदीप के पिता हरियाणा सरकार में इंजीनियर थे. संदीप ने कुरुक्षेत्र यूनिर्सिटी से 1992 में बीकॉम किया और इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से मास्टर्स की पढ़ाई के बाद कुछ साल कई छोटे फर्म में जॉब की. इसके बाद 1999 में वे एमबीए करने के लिए अमेरिका चले गए. 

प्लान करने से नहीं बनते बिलियनेयर 

संदीप ने कुछ साल पहले इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि कोई बिलियनेयर बनने के लिए प्लान नहीं करता. उनका कहना है, 'किसी बिलियनेयर की यात्रा इस तरह से नहीं शुरू होती कि वह खुद से यह कहता है कि वह बिलियनेयर बनना चाहता है. यह यात्रा इस तरह से शुरू होती है कि आपमें कुछ ऐसा करने का जूनुन या अदम्य इच्छा होती है, जिसकी कोश‍िश किए बिना आप रह नहीं पाते.' 

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क्यों नहीं सफल होते लोग 

संदीप का कहना है कि 98 फीसदी लोग अपनी उद्यमिता की यात्रा इसलिए नहीं शुरू कर पाते, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह आसान नहीं है.उद्यमिता वास्तव में आपके दृढ़ निश्चय की परीक्षा होती है. लोग आपको जज करते हैं, लेकिन आपको अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहना होता है. दूसरे लोग आपके आइडिया को धूल समझेंगे, लेकिन आपको उसे चट्टान समझना होगा.' 

 

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