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अब इस सरकारी बैंक ने भी बढ़ाई ब्याज दरें, महंगे हुए कार और पर्सनल लोन

इससे पहले SBI ने अप्रैल में भी एमसीएलआर को 0.10 फीसदी बढ़ाया था. रिजर्व बैंक ने बेकाबू होती महंगाई के कारण इस महीने एमपीसी की एक आपात बैठक (RBI MPC Meeting) की. इसके बाद सेंट्रल बैंक ने रेपो रेट को चार साल के अंतराल के बाद पहली बार बढ़ाने का ऐलान किया था.

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महंगे हो गए लोन
महंगे हो गए लोन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रेपो रेट हाइक के बाद महंगे हो रहे लोन
  • सभी बैंक बढ़ा रहे हैं लोन की ब्याज दरें

रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ाने का असर अब दिखने लगा है. रेपो रेट हाइक (Repo Rate Hike) के बाद बैंक अपने लोन प्रॉडक्ट की ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ा रहे हैं. अब देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) ने एमसीएलआर (MCLR) यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेन्डिंग रेट को 0.10 फीसदी बढ़ा दिया है. बढ़ी दरें 15 मई से लागू हो गई हैं. एमसीएलआर बढ़ने से एसबीआई के कार लोन (Car Loan) और पर्सनल लोन (Personal Loan) महंगे हो गए हैं.

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अब बढ़कर इतनी हो गई ब्याज दरें

एसबीआई की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, एमसीएलआर में हालिया बदलाव के बाद 03 महीने तक के कर्ज के लिए रेट 6.75 फीसदी से बढ़कर 6.85 फीसदी हो गया है. इसी तरह छह महीने के कर्ज के लिए एमसीएलआर 7.05 फीसदी से बढ़कर 7.15 फीसदी हो गया है. इनके साथ ही अब नई दरें एक साल के लिए बढ़कर 7.20 फीसदी, दो साल के लिए 7.40 फीसदी और तीन साल के लिए 7.50 फीसदी हो गई हैं.

अप्रैल में भी एसबीआई ने बढ़ाया था ब्याज

इससे पहले एसबीआई ने अप्रैल में भी एमसीएलआर को 0.10 फीसदी बढ़ाया था. रिजर्व बैंक ने बेकाबू होती महंगाई के कारण इस महीने एमपीसी की एक आपात बैठक (RBI MPC Meeting) की. इसके बाद सेंट्रल बैंक ने रेपो रेट को चार साल के अंतराल के बाद पहली बार बढ़ाने का ऐलान किया था. अब रेपो रेट 4 फीसदी से बढ़कर 4.40 फीसदी हो गया है. जून में होने वाली अगली बैठक में भी रेपो रेट बढ़ाए जाने के अनुमान हैं. एनालिस्ट मान रहे हैं कि इसके साथ ही अब सस्ते कर्ज का दौर समाप्त हो चुका है.

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अप्रैल में रिकॉर्ड हाई पर पहुंची महंगाई

अप्रैल में थोक महंगाई (Wholesale Inflation) 15 फीसदी के पार रही है. यह थोक महंगाई के लिए 1998 के बाद का सबसे उच्च स्तर है. अप्रैल 2022 में थोक महंगाई की दर 15.08 फीसदी रही है. इससे पहले खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के आंकड़े जारी हुए थे. खुदरा महंगाई मई 2014 के बाद के उच्च स्तर पर है.

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