अमेरिका और चीन में तनाव से भारत को एक बड़ा मौका हाथ लगा है. सेमीकंडक्टर बनाने वाली अमेरिकी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Technology) ने भारत में प्लांट लगाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है.
केंद्रीय आईटी और टेलीकॉम मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 3 जुलाई को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा संकेत दिया. उन्होंने कहा कि अगले 4 से 6 हफ्तों में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास समारोह होगा. बता दें, गुजरात में कारखाने के लिए जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गुजरात में माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा दिसंबर 2024 से चिप का प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा.
साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिसव (DLI) स्कीम के तहत 4 कंपनियों को मंजूरी दी गई है. 28 जून को अमेरिकी चिप मेकर Micron ने सेमीकंडक्टर प्लांट बनाने के लिए भारत सरकार के साथ एक समझौता किया है. माइक्रोन ने कहा है कि वह इस फैसिलिटी में 82.5 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी. इस तरह भारत सरकार सहित कुल 2.75 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा. फैक्ट्री का निर्माण गुजरात के साणंद में किया जाएगा.
पीएम ंमोदी से हुई थी डील
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले महीने अमेरिकी यात्रा के दौरान माइक्रोन के साथ डील प्रमुख मुद्दों में से एक था. पीएम मोदी ने 21 जून को वॉशिंगटन डीसी में माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर संजय मेहरोत्रा से मुलाकात की थी, और उन्हें भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित किया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान Micron कंपनी की ओर से एक बयान में कहा गया कि कि माइक्रॉन गुजरात में सेमीकंडक्टर टेस्ट और असेंबली प्लांट लगाएगी. दो चरणों में विकसित किए जाने वाले इस संयंत्र पर वह अपनी तरफ से 82.5 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी. बाकी राशि का निवेश केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किया जाएगा.
Micron कंपनी का भारत को लेकर प्लान
संजय मेहरोत्रा ने कहा है कि स्थानीय सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम विकसित करने के लिए भारत जो कदम उठा रहा है, उससे हम उत्साहित हैं. मैं भारत सरकार और इसमें शामिल सभी अधिकारियों का आभारी हूं, जिन्होंने इस निवेश को संभव बनाया है. कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि गुजरात में प्लांट का निर्माण इसी साल शुरू होने की उम्मीद है. चरण 1, जिसमें 500,000 वर्ग फुट नियोजित क्लीनरूम स्पेस शामिल होगा, जो 2024 के अंत में चालू हो जाएगा.
माइक्रोन टेक्नोलॉजी के मुताबिक, दोनों ही फेज के जरिए प्रत्यक्ष तौर पर लगभग 5,000 रोजगार उपलब्ध होंगे. जबकि 15,000 लोगों को अगले कई साल तक परोक्ष रूप से रोजगार मिलता रहेगा. गौरतलब है कि मौजूदा समय में भारत सेमीकंडक्टर के लिए चीनी, ताइवान और कोरिया जैसे देशों पर निर्भर है. ऐसे में अगर अमेरिकी चिप कंपनियां भारत में आती हैं और सेमीकंडक्टर की मैन्युफैक्चरिंग करती हैं तो ये देश की इकोनॉमी को बूस्ट देगा.
चीन में Micron कंपनी के प्रोडक्ट पर बैन
बता दें, पिछले दिनों G7 शिखर सम्मेलन में जारी एक संयुक्त बयान से तिलमिलाए चीन ने अपने यहां अमेरिका स्थित माइक्रोन टेक्नोलॉजी के चिप्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है. माइक्रोन टेक्नोलॉजी अमेरिकी की सबसे बड़ी मेमोरी चिप निर्माता कंपनी है, चीन ने इस कंपनी पर सुरक्षा खतरे का हवाला देते हुए प्रतिबंधि लगा दिया था. अमेरिका ने इसका विरोध करते हुए इसे बिना किसी आधार के की गई चीनी कार्रवाई बताया.
माइक्रोन टेक्नोलॉजी अगले साल से भारत में चिप बनाना शुरू कर देगी. चीन ने जिस तरह से इस कंपनी के बिक्री पर बैन लगाया है इसका सीधा फायदा भारत को होने वाला है. क्योंकि कंपनी का प्लांट चीन में है और वहां चिप निर्माण का काम कर रही थी. लेकिन चीन में कंपनी कारोबार बंद होने से यह अमेरिकी कंपनी भारत पर ज्यादा फोकस कर पाएगी.