2 अप्रैल की देर रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत समेत दुनिया के 180 से ज्यादा देशों पर टैरिफ का ऐलान किया, जिसमें भारत पर 27% टैरिफ (Tariff on India) लगाया गया है. कुछ सेक्टर्स को अमेरिका के टैरिफ से छूट दी गई है, लेकिन कुछ पर हैवी टैरिफ लगाया गया है जैसे- ऑटो सेक्टर पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत पर 27% टैरिफ लगाने के बावजूद भी क्यों इसका असर शेयर बाजार (Stock Market) पर क्यों नहीं दिख रहा है?
BSE टॉप 30 शेयरों वाले सेंसेक्स (Sensex) 331 अंक गिरकर 76287 पर कारोबार कर रहा है. वहीं निफ्टी की बात करें तो यह 80 अंक गिरकर 23252 अंक पर है. निफ्टी बैंक (Nifty Bank) ग्रीन जोन में कारोबार कर रहा है और इसमें 200 अंकों से ज्यादा की तेजी आई है. यह गिरावट इतनी बड़ी नहीं है, जितनी की एक्सपर्ट ट्रंप के टैरिफ लगाने से पहले उम्मीद जता रहे थे. यह गिरावट भारतीय बाजार के अच्छी स्थिति को दिखा रहा है. आइए जानते वह पांच कारण जिससे बाजार में हैवी गिरावट नहीं आई.
क्यों ज्यादा नहीं गिरा शेयर बाजार?
भारत के लिए हानिकारक नहीं अमेरिकी टैरिफ
उन्होंने आगाह किया कि अमेरिकी टैरिफ भारतीय बाजार (Indian Stock Market) के लिए उतने नकारात्मक नहीं हैं, लेकिन जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. टैरिफ के बाद भारत आगे की पंक्ति में है, लेकिन अभी खुश होना जल्दबाजी होगी. इंडिया एक्सपोर्ट और बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग के कारण भारत की GDP पर प्रभाव सीमित रहेगा.
प्रीओपेन मार्केट से घबराए थे निवेशक
प्रीओपेन मार्केट में Sensex में 3,000 अंकों की गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई होगी, लेकिन 27 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ के प्रति शुरुआती प्रतिक्रिया के बाद घरेलू शेयर बाजार में ज्यादा गिरावट नहीं आई.
व्यापार शुल्क संबंधी चिंताओं के बीच, भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार को अच्छी रिकवरी देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से करीब 690 अंक उछलकर 76,494 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स अपने इंट्राडे निचले स्तर से 160 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 23,306.50 अंक पर पहुंच गया.
ज्यादा गिरावट नहीं होने के ये भी कारण
कुछ सेक्टर में छूट देने को लेकर कहा जा रहा है कि यह भारत के लिए अच्छे संकेत हैं. जिसमें फार्मा, मेटल, ज्वैलरी और अन्य सेक्टर्स शामिल हैं. निर्मल बैंग इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से दोनों पक्षों के बीच शुल्क और बाजार पहुंच से जुड़े कुछ मुद्दे सुलझ सकते हैं. साथ ही भारत अमेरिका से कच्चे तेल, डिफेंस आदि की अधिक खरीद के लिए भी प्रतिबद्ध है. फार्मा क्षेत्र को छूट दी गई, लेकिन स्टील और एल्युमीनियम क्षेत्र पर अमेरिका की ओर से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया गया.