महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया है. वोटों की गिनती यानी काउंटिंग 23 नवंबर को होगी, उससे पहले एग्जिट पोल की झड़ी लग गई है. लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ चुनावों में एग्जिट पोल के उलट परिणाम आए हैं, उसे देखते हुए एग्जिट पोल में लगाए जा रहे अनुमानों को लेकर विश्वास थोड़ा डिगा है.
दरअसल, महाराष्ट्र एक बड़ा राज्य है और मुंबई आर्थिक राजधानी भी है. झारखंड भी उद्योग के हिसाब से बड़ा राज्य है. दोनों राज्य आर्थिक मोर्चे पर अहम हैं. चुनाव से पहले महाराष्ट्र में एनडीए की सरकार थी, जबकि झारखंड में INDIA गठबंधन की सरकार थी.
शेयर बाजार में दिखेगा एग्जिट पोल का असर
अब एग्जिट पोल देखें तो अधिकतर एजेसियां अनुमान लगा रही हैं कि महाराष्ट्र में एनडीए यानी महायुति की सरकार सत्ता में बरकरार रह सकती है. हालांकि कुछ एग्जिट पोल में महाविकास अघाड़ी को बढ़त की बात की जा रही है.
कुछ इसी तरह का अनुमान झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर एग्जिट पोल में दिखाए जा रहे हैं, यहां भी बीजेपी की राह आसान बताई जा रही है. यानी NDA की सरकार बन सकती है. जबकि कुछ एजेसियां यहां भी JMM को सत्ता बचाने में कामयाब दिखा रही हैं.
लेकिन इन सबके बीच आज यानी गुरुवार को शेयर बाजार (Share Market) की चाल अहम कड़ी होगी. देश-दुनिया के तमाम बड़े निवेशकों की नजरें इन चुनावों पर हैं. वो भी अपने तरीके से रिजल्ट को लेकर अनुमान लगा रहे होंगे, जिसकी झलक गुरुवार को शेयर बाजार में देखने को मिल सकती है.
जानकारों की मानें तो अगर आज शेयर बाजार में तेजी आती है तो फिर ये अनुमान लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र में एनडीए की सरकार वापस आ रही है. वहीं गिरावट रहने पर महाविकास अघाड़ी के पक्ष में नतीजे या फिर रिजल्ट फंसने का संकेत भी रहेगा.
महाराष्ट्र आर्थिक नजरिये से अहम राज्य
दरअसल, केंद्र सरकार के लिए महाराष्ट्र एक अहम राज्य है. अगर यहां फिर से महायुति की सरकार बनती है तो तमाम नीतियों को लेकर टकराव की स्थिति नहीं आएगी. वैसे भी मुंबई देश की आर्थिक राजधानी हैं और राज्य में देश-दुनिया तमाम बड़ी कंपनियां हैं. लेकिन अगर यहां सत्ता परिवर्तन होकर महाविकास अघाड़ी को सरकार बनाने का मौका मिलता है तो फिर केंद्र और राज्य के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद देखने को मिल सकते हैं.
झारखंड के साथ भी यही स्थिति है. यहां टाटा ग्रुप के स्टील प्लांट से लेकर तमाम बड़ी कंपनियां हैं. कोल माइनिंग समेत कई बड़े खदान भी झारखंड में हैं. अगर यहां NDA सत्ता में आती है तो शेयर बाजार में इसकी झलक देखने को मिल सकती है. दरअसल, बाजार हमेशा से स्थिर सरकार के पक्ष रहता है, फिर वो चाहे किसी की भी हो. अगर केंद्र और राज्य में एक ही दल सरकार बनाने में कामयाब रहता है तो उद्योग जगत के लिए नीतियों के मोर्चे पर निर्णय लेना आसान होता है.
बता दें, बुधवार को महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव की वजह से शेयर बाजार बंद थे. अब गुरुवार का दिन बाजार के लिए अहम रहने वाला है, क्योंकि इससे पहले मंगलवार को शेयर बाजार में जोरदार तेजी आई थी. लेकिन आखिरी एक घंटे में बाजार तेजी से फिसला. एक समय सेंसेक्स 1000 अंक ऊपर था, जो कि कारोबार बंद होने तक महज 239 अंक ही ऊपर रहा.
बाजार को बड़े ट्रिगर का इंतजार
हालांकि मंगलवार को बाजार हफ्तेभर के बाद ग्रीन जोन में बंद होने में कामयाब रहा था. लेकिन अभी भी बाजार भारी दबाव महसूस कर रहा है. सितंबर में सेंसेक्स 85,978.25 अंक तक पहुंच गया है, जहां से गिरकर मंगलवार को 77,578.38 अंक पहुंच गया. यानी अपने हाई से सेंसेक्स 8000 अंक टूट चुका है.
इस बीच निवेशकों के पोर्टफोलियो में 10 से 30 फीसदी तक का डेंट लग चुका है. इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण दूसरी तिमाही के नतीजे अनुमान के अनुरूप नहीं रहना है. लेकिन जानकार मान रहे हैं कि अब बाजार बहुत गिर चुका है और बाजार को अपनी चाल बदलने के लिए एक बड़ा ट्रिगर चाहिए. ऐसे में महाराष्ट्र और झारखंड का चुनाव एक अहम कड़ी साबित हो सकता है. नतीजों से पहले बाजार आज एग्जिट पोल पर रिएक्शन दे सकता है. वैसे कहा भी जाता है कि बाजार किसी भी फैसले को आम जनता से पहले भांप लेता है.