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कॉलेज की फीस से तीन दोस्‍तों ने शुरू किया ये काम, फिर खड़ी कर दी 590 करोड़ की कंपनी

इस स्‍टार्टअप की नींव 2018 में अन‍िरुद्ध शर्मा, राहुल रावत और तनवीर अहमद ने रखी थी. इन्‍होंने एक ऐसी सैटेलाइट का समूह बनाने पर काम किया है, जो छोटी से छोटी वस्‍तु का पता लगा सकता है. अपने सफर में दिगंतारा ने कई बड़े निवेशकों से फंडिंग हासिल की है.

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दिगंतारा की शुरुआत करने वाले अन‍िरुद्ध शर्मा, राहुल रावत और तनवीर अहमद (फोटो- फोर्ब्‍स)
दिगंतारा की शुरुआत करने वाले अन‍िरुद्ध शर्मा, राहुल रावत और तनवीर अहमद (फोटो- फोर्ब्‍स)

कोई भी नया विचार किसी को भी कमायाबी दिला सकता है. इसी का उदाहरण तीन दोस्‍त हैं, जिन्‍होंने अपने कॉलेज की फीस से काम शुरू किया और आज करोड़ों के मालिक बन चुके हैं. उन्‍होंने एक ऐसे स्टार्टअप की शुरुआत की, जो अंतरिक्ष सेक्‍टर के लिए काम करती है. यह स्टार्टअप अंतरिक्ष मलबे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए काम कर रहा है. अंतरिक्ष उद्योग में क्रांति लाने के लिए दिगंतारा ने कई इनोवेशन किया है. 

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इस स्‍टार्टअप की नींव 2018 में अन‍िरुद्ध शर्मा, राहुल रावत और तनवीर अहमद ने रखी थी. इन्‍होंने एक ऐसी सैटेलाइट का समूह बनाने पर काम किया है, जो छोटी से छोटी वस्‍तु का पता लगा सकता है. अपने सफर में दिगंतारा ने कई बड़े निवेशकों से फंडिंग हासिल की है और कई देशों में यह अपनी सेवाएं दे रही है. आइए जानते हैं इन दोस्‍तों ने आखिर कैसे इस कंपनी की शुरुआत की. 

कैसे हुई थी शुरुआत?
दिगंतारा की कहानी 2018 में शुरू हुई थी. उन्‍होंने पढ़ा था कि अंतरिक्ष क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं, जिस कारण उनका सॉल्‍यूशन खोजने के बारे में सोचा. उन्‍होंने अंतरिक्ष मलबे के बढ़ते खतरे को देखते हुए ऐसी तकनीक डेवलप करने की ठानी, जो अंतरिक्ष में सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करती हो. इस स्टार्टअप को शुरुआती दौर में कलारी कैपिटल से 25 लाख डॉलर का निवेश मिला. इस पैसे से उन्‍होंने अपनी टेक्‍नोलॉजी मजबूत की.

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कंपनी के शुरुआत करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे. पहला काम पूरा करने के लिए पैसे नहीं थे, जिस कारण राहुल और अनिरुद्ध ने अपनी कॉलेज फीस इस काम को पूरा करने में लगा दी. उन्‍होंने इस पैसे से रॉकेट के पार्ट्स खरीदे जो कॉन्‍ट्रैक्‍ट पूरा करने के लिए जरूरी था. उनके द्वारा बनाई गई चीजें देखकर काम देने वाली कंपनी काफी प्रभावित हुई. फिर क्‍या था दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (Digantara Research and Technologies) की गाड़ी चल पड़ी. 

क्‍या करती है इनकी कंपनी? 
इनकी कंपनी छोटे सैटेलाइट बनाती है, जो अंतरिक्ष में घूमते हैं और वे जानकारी जुटाते हैं. उनके सैटेलाइट में लगे सेंसर 1 सेंटीमीटर जितनी छोटी वस्‍तुओं का भी पता लगा सकती है. जून 2022 में दिगंतारा ने पीक XV पार्टनर्स के नेतृत्व में 1 करोड़ डॉलर का सीरीज A1 फंडिंग राउंड पूरा किया. फरवरी 2023 में इस फंडिंग राउंड को 1.2 करोड़ डॉलर पर बंद किया गया. 

590 करोड़ की कंपनी 
इस कंपनी के विदेशों में कस्‍टमर्स हैं. इसके अलावा सिंगापुर, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इस कंपनी ने बड़ी डील्‍स की है. कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि है उसका खुद का मिलिट्री एंड डिफेंस सूट. इसे STARS (Space Threat Assessment & Response Suite) के नाम से जाना जाता है. इसरो के साथ भी मिलकर कंपनी ने अच्‍छा काम किया है. स्टार्टअप इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, दिगंतारा का मूल्यांकन लगभग 590 करोड़ रुपये आंका गया है. 

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