एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को बड़ी राहत दी है. उन्हें एजीआर बकाया चुकाने के लिए 10 साल का वक्त मिल गया है. यह खासकर वोडफोन-आइडिया, एयरटेल के लिए काफी राहत की बात है.
कोर्ट ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियों को बकाये का 10 फीसदी 31 मार्च 2021 तक चुकाना होगा. गौरतलब है कि कई कंपनियों ने तो अभी ही बकाये का 10 फीसदी चुका दिया है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कोविड संकट को देखते हुए यह मोहलत दी जा रही है.
टेलीकॉम यूजर्स के लिए भी अच्छी खबर
यह टेलीकॉम यूजर्स के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि अब टेलीकॉम कंपनियां टैरिफ फिलहाल नहीं बढ़ाएंगी. जस्टिस मिश्रा 2 सितंबर यानी बुधवार को ही रिटायर हो रहे हैं. कोर्ट ने कहा था कि यह फैसला तीन आधार पर होगा. पहला, टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर बकाया चुकाने के लिए टुकड़ों-टुकड़ों में एजीआर बकाया चुकाने की मोहलत दी जाए या नहीं, दूसरा-जो कंपनियां इंसाल्वेंसी प्रक्रिया का सामना कर रही हैं उनके बकाये को कैसे वसूला जाए और तीसरा-क्या ऐसी कंपनियों द्वारा अपने स्पेक्ट्रम को बेचना वैध है.
वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल ने एजीआर बकाया चुकाने के लिए 15 साल का समय मांगा था. अभी तक 15 टेलीकॉम कंपनियों ने सिर्फ 30,254 करोड़ रुपये चुकाये हैं, जबकि कुल बकाया 1.69 लाख करोड़ रुपये का है.
क्या होता है AGR
एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है. इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है.
असल में दूरसंचार विभाग कहता है कि AGR की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी को होने वाले संपूर्ण आय या रेवेन्यू के आधार पर होनी चाहिए, जिसमें डिपॉजिट इंट्रेस्ट और एसेट बिक्री जैसे गैर टेलीकॉम स्रोत से हुई आय भी शामिल हो.
दूसरी तरफ, टेलीकॉम कंपनियों का कहना था कि AGR की गणना सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली आय के आधार पर होनी चाहिए. लेकिन पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ फैसला दिया था और यह कहा था कि वे तत्काल एजीआर का बकाया चुकायें. करीब 15 टेलीकॉम कंपनियों का कुल बकाया 1.69 लाख करोड़ रुपये के आसपास है.