भारत में तीज, रक्षा बंधन, जनमाष्टमी और गणेश चतुर्थी फेस्टिव सीजन (Festive Season) के शुरुआती त्योहार माने जाते हैं. इन त्योहारों पर हुई विभिन्न सामानों और मिठाइयों व स्नैक्स (Sweets & Snacs) की बिक्री से आने वाले त्योहारों जैसे दशहरा, दीपावली-भाई दूज के दौरान बिक्री का अनुमान लगाया जाता है. आखिरकार कोरोना (Corona) के प्रकोप में गुजरे 2 साल बाद मिठाइयों और नमकीन की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिल रहे हैं और उम्मीद है कि इस साल यह रिकॉर्ड स्तर पर जाएगी.
कोरोना के बाद बाजारों में उत्साह
इस बार का त्योहारी सीजन इसलिए बेहद खास बन गया है, क्योंकि इस बार सभी त्योहारों को कोराना के साए से परे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस उत्साह का असर बाजारों (Markets) में भी देखने को मिल रहा है, जहां पर बिक्री तमाम रिकॉर्ड तोड़ने को बेकरार नजर आ रही है. वैसे तो हर त्योहार पर खरीदारी के अलग-अलग सेगमेंट्स को फायदा मिलता है, लेकिन इस दौरान मिठाइयों और नमकीन की जोरदार बिक्री (Sweets & Snacs Sale) देखने को मिलती है.
ऑल टाइम हाई पर पहुंचेगा कारोबार
मिठाइयों और नमकीन की बिक्री के शुरुआती रुझानों के मुताबिक 2022-23 में मिठाई और नमकीन का कुल कारोबार 1.25 लाख करोड़ रुपये के ऑल टाइम हाई पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है. फेडरेशन ऑफ स्वीट्स एंड नमकीन मैन्युफैक्चरर्स के निदेशक फिरोज एच नकवी (Firoz H Naqawi) की मानें तो इस बार रक्षाबंधन पर मिठाई-नमकीन के कारोबार में आई तेजी के बाद रिकॉर्ड बिक्री होने का भरोसा बढ़ गया है. ऐसे में दशहरा, दीपावली और होली पर बिक्री बढ़ने से नए रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है.
महामारी ने किया इतना नुकसान
कोरोना (Corona) के साये में गुजरे बीते 2 साल मिठाई उद्योग के लिए संघर्ष भरे रहे हैं. खासकर प्रकोप का पहला साल बेहद कठिनाइयों से घिरा रहा था. फेडरेशन ऑफ स्वीट्स एंड नमकीन मैन्युफैक्चरर्स के मुताबिक कोरोना के पहले साल 2020-21 में मिठाई-नमकीन उद्योग को 35,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.
उस दौरान पूरे साल में कुल कारोबार सिमटकर 65,000 करोड़ रुपये का रह गया था. हालांकि, 2021-22 में इसने वापसी की और ये कारोबार 1.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. बिक्री बढ़ने की एक बड़ी वजह ऑनलाइन खरीदारी को माना जा रहा है. साथ ही रिटेल दुकानदारों की होम डिलीवरी भी बिक्री को बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है.
मिठाइयों के एक्सपोर्ट में फिसड्डी
घरेलू डिमांड में रिकवरी के बाद अब उद्योग की मांग है कि सरकार को एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए मदद करनी चाहिए. दरअसल, भारत से मिठाइयों का सालाना निर्यात महज 2 से 3 हजार करोड़ रुपये का है. इसकी वजह है कि ब्रिटेन, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देशों को दूध से बनी मिठाइयां भेजने में रेगुलेटरी ब्रेकर्स हैं. उद्योग सरकार से ये अड़चनें दूर करने की मांग कर रहा है. जिससे घरेलू मिठाई निर्माताओं के साथ ही देश के दुग्ध उत्पादक किसानों को भी फायदा मिल सकता है.
काजू कतली जैसी ड्राई-फ्रूट्स से बनी मिठाइयों की खाड़ी देशों में अच्छी-खासी मांग है. इस उद्योग के बढ़ने से रोजगार में भी इजाफा होगा, क्योंकि देश का मिठाई-नमकीन उद्योग संगठित और असंगठित तौर पर एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है.
इंदौरी नमकीन की है विदेशों तक धूम!
फेस्टिव सीजन में धमाल मचाने वाले इस कारोबार में नमकीन उद्योग की हिस्सेदारी 50,000 करोड़ रुपये की है. नमकीन उत्पादन के मामले में इंदौर के हाथ में कमान है, जहां करीब 1,500 यूनिट्स इन्हें बनाती हैं. इंदौर समेत भारत के दूसरे शहरों में बनी नमकीन की देश के साथ ही विदेशों में भी खूब डिमांड है. इस बार रक्षाबंधन के दौरान नमकीन की डिमांड बढ़ने के बाद अनुमान है कि दीपावली पर भी जमकर ऑर्डर आएंगे, जिससे ये कारोबार बुलंदियों को छूने में कामयाब रहेगा.