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फिर Tata की होगी Air India? ऐसे बनी थी प्राइवेट से सरकारी कंपनी

प्राइवेटाइजेशन की राह देख रही Air India के लिए कई कंपनियों ने बोलियां जमा की हैं. इसमें Tata Group का नाम सबसे आगे है. अब देखना ये है कि कभी टाटा ग्रुप की कंपनी रही एयर इंडिया क्या फिर से उसी के पास पहुंचेगी या किसी और के हाथ में इसकी कमान जाएगी.

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किसकी होगी Air India
किसकी होगी Air India
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पहले Tata Air Service था Air India का नाम
  • 1932 में JRD Tata ने शुरू की थी Air India
  • 2007 में Indian Airlines का विलय कर दिया गया

Air India के लिए सरकार ने फाइनेंशियल बिड्स मंगवाई थीं. सरकार इसी वित्त वर्ष में इस सरकारी एयरलाइंस का प्राइवेटाइजेशन करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. ये सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा भी है. अब इसके लिए कई कंपनियों ने फाइनेंशियल बिड जमा की हैं जिसमें Tata का नाम सबसे आगे है. 

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Tata के पास वापस लौटेगी Air India?

Air India की खरीद में कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है. इसमें Tata Group का नाम सबसे आगे है. Air India की शुरुआत 1932 में टाटा ग्रुप ने ही की थी. टाटा समूह के जे. आर. डी. टाटा (JRD Tata) ने इसकी शुरुआत की थी, वे खुद भी एक बेहद कुशल पायलट थे. अब Tata Group ने इसकी खरीद के लिए फाइनेंशियल बिड जमा की है, तो देखना होगा कि क्या Air India वापस से टाटा समूह के पास लौटती है.

ऐसे सरकारी कंपनी बनी Air India

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत से सामान्य हवाई सेवा की शुरुआत हुई और तब इसका नाम Air India रखकर इसे एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बना दिया गया. वर्ष 1947 में देश की आज़ादी के बाद एक राष्ट्रीय एयरलाइंस की जरूरत महसूस हुई और भारत सरकार ने Air India में 49% हिस्सेदारी अधिग्रहण कर ली. इसके बाद 1953 में भारत सरकार ने एयर कॉरपोरेशन एक्ट पास किया और Tata Group से इस कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी खरीद ली. इस तरह Air India पूरी तरह से एक सरकारी कंपनी बन गई. 

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पहले भी की गई प्राइवेटाइजेशन की कोशिश

Air India के प्राइवेटाइजेशन की कोशिश पहले भी की गई है. सबसे पहले इसे फिर से प्राइवेट हाथों में देने का विचार 2000-2001 के दौरान आया था. लेकिन तब बात बनी नहीं.

फिर 2007 में इसमें Indian Airlines का विलय कर दिया गया. इस विलय के बाद से Air India का एक बुरा दौर शुरू हो गया. उस समय दोनों कंपनियों का कुल घाटा 2006-07 में करीब 7.7 अरब रुपये था, जो 2009 में बढ़कर 72 अरब रुपये तक पहुंच गया.

इसके बाद तब की यूपीए सरकार ने Air India को बेल आउट पैकेज देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन इसे बचाया नहीं जा सका. बाद में वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने फिर से इसके प्राइवेटाइजेशन की रूपरेखा बनाई.

मार्च 2018 में सरकार ने इसके लिए कंपनियों से रुचि पत्र (EOI) मंगवाए लेकिन तब भी इसे हाथों-हाथ नहीं लिया गया और ये कोशिश नाकाम रही. इसके बाद कोरोना महामारी ने इसके प्राइवेटाइजेशन में देरी की. लेकिन 2021-22 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष में इसके विनिवेश का लक्ष्य रखा है. 

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