देश के लोगों को फिलहाल महंगाई (Inflation) से राहत मिलती नहीं दिख रही है. मंगलवार को सरकार द्वरा जारी किए गए आंकड़े में थोक महंगाई दर (WPI Inflation) 15.88 प्रतिशत पहुंच गई है, जो अप्रैल के महीने में 15.08 फसदी थी. साल 2012 के बाद पहली बार महंगाई दर इस लेवल पर पहुंची है. पिछले साल के मुकाबले इस साल थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है. मई 2021 में थोक महंगाई दर 13.11 फीसदी रही थी. सोमवार की शाम को आए आंकड़े के अनुसार खुदरा महंगाई दर में गिरावट आई थी, लेकिन थोक महंगाई दर में इजाफा हुआ है.
लगातार बढ़ रही है महंगाई
खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में हुई बढ़ोतरी की वजह से महंगाई दर में इजाफा हुआ है. ईंधन और बिजली की महंगाई दर में बढ़ोतरी की वजह से भी थोक महंगाई दर बढ़ी है. इस साल के आंकड़े देखें तो अप्रैल में थोक महंगाई दर 15.08 फीसदी रही थी, मार्च में 14.55 फीसदी, फरवरी में 13.11 फीसदी और जनवरी 2022 में 12.96 फीसदी रही थी. आंकड़ों के हिसाब से मई लगातार 14वां महीना है, जब थोक महंगाई की दर 10 फीसदी से ऊपर है.
प्राथमिक जरूरत का सामान महंगा
खाद्य मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 10.89% हो गई, जो अप्रैल में 8.88% थी. कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (8.52 प्रतिशत), खाद्य पदार्थ (2.40 प्रतिशत), खनिज (1.73 प्रतिशत) और गैर-खाद्य वस्तुओं (1.52 प्रतिशत) की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.
खाद्य पदार्थों में अनाज, धान, गेहूं, दालें, सब्जियां, आलू, प्याज, फल, दूध, अंडे और मांस-मछली जैसी चीजें शामिल हैं. ईंधन और बिजली इंडेक्स, जिसमें एलपीजी और पेट्रोलियम जैसे आइटम शामिल हैं.
खुदरा महंगाई में गिरावट
सोमवार को जारी मई की खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) में गिरावट आई है और अब ये 7.04 फीसदी हो गई है. खाद्य महंगाई (Food Inflation) दर 8.31% से घटकर 7.97% हो गई. केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल पर 8 और 6 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी. इसके बाद राज्यों ने भी वैट को कम किया था.
आरबीआई ने बढ़ाया था रेपो रेट
इसके अलावा सरकार ने लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए ईंधन की कीमतों में कटौती की थी. इस बीच कुछ दिन पहले ही आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 6-8 जून को हुई बैठक में प्रमुख ब्याज दर में 50 बेसिस प्वाइंट (BP) की बढ़ोतरी की घोषणा की गई थी, क्योंकि महंगाई दर कंफर्ट लेवल से ऊपर बनी हुई है. रेपो रेट 0.50 फीसदी बढ़कर 4.90 फीसदी हो गया है. इसकी वजह से होम लोन, पर्सनल लोन या वाहन के लिए कर्ज लेने वालों की EMI में बढ़ोतरी हुई है.