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तीन काम... जिनके लिए हमेशा याद आएंगे मनमोहन सिंह, बदल दी देश की तस्वीर!

Manmohan Singh ने 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है, लेकिन प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में उनके द्वारा शुरू किए गए तीन काम हमेशा नाम रहेंगे, जो उनके लिए बड़ी उपलब्धियां हैं.

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विदेशी कंपनियों के लिए भारत के दरवाजे खोलने में दिवंगत मनमोहन सिंह का बड़ा रोल
विदेशी कंपनियों के लिए भारत के दरवाजे खोलने में दिवंगत मनमोहन सिंह का बड़ा रोल

देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं रहे (Manmohan Singh Passes Away), उन्होंने 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली. उन्होंने सिर्फ पीएम ही नहीं, प्रमुख अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने देश के वित्त मंत्री (Finance Minister) के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं. अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने तीन ऐसे काम किए, जो हमेशा उनके नाम रहेंगे. ये काम ऐसे थे, जो देश की तस्वीर बदलने वाले साबित हुए. आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से... 

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इकोनॉमी को बुरे दौर में संभाला 
भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था है और जल्द इसके पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की उम्मीद जाहिर की जा रही है. लेकिन 90 के दशक में हालात बिल्कुल विपरीत थी, उस समय देश में पीवी नरसिंह राव की सरकार थी और वित्त मंत्री दिवंगत डॉ मनमोहन सिंह थे. ग्लोबल मार्केट में भारत की साथ निचले स्तर पर पहुंच चुकी थी. इंडियन करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले धराशायी हो गई थी और विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका था. एक प्रकार से देश दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया था. लेकिन वित्त मंत्री ने देश के मिजाज को समझा और कुछ ऐसे फैसले लिए जिनसे भारत की वो तस्वीर ही बदल गई. 

पहला काम- उदारीकरण, 'लाइसेंस राज' का खात्मा
दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह साल 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री रहे थे और इस दौरान उन्होंने भारी आर्थिक संकट की स्थिति में बड़े फैसले लेकर इकोनॉमी को संकट से निकाला था. इन कामों में पहला और सबसे बड़ा था 'लाइसेंस राज' को खत्म करना. उन्होंने ऐसी नीतियां बनाईं, जिनके जरिए भारत में विदेशी निवेश के लिए दरवाजे ओपन हो गई. 

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लाइसेंसी राज को खत्म करके आर्थिक उदारीकरण के नए युग की शुरुआत का श्रेय दिवंगत मनमोहन सिंह को ही जाता है. आयात के लिए लाइसेंस को खत्म करना, ज्यादातर बिजनेस के लाभकारी रहा, क्योंकि उनके लिए कई तरह के लाइसेंस लेने की बाध्यता खत्म हो गई थी. इसके साथ ही विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई गई, जिससे भारत में तेजी से फॉरेन इन्वेस्टमेंट आने की शुरुआत हो गई. भारत में काम करने वाली कंपनियों को चुनौतियां तो मिलीं, लेकिन आज देश में जो विदेशी कंपनियों अपना बड़ा कारोबार कर रही हैं, वो मनमोहन सिंह की ही देन हैं. उन्होंने कॉर्पोरेट टैक्स से लेकर इंपोर्ट शुल्क में कटौती समेत अन्य कई बड़े कदम उस समय बढ़ाए थे. 

दूसरा काम- अमेरिका से न्यूक्लियर डील
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बड़े फैसलों में अगला और अहम है अमेरिका के साथ भारत की न्यूक्लियर डील. 1974 में राजस्थान के पोखरण में देश के पहले परमाणु परीक्षण के बाद US-India रिश्तों में तनाव देखने को मिला था. जब मनमोहन सिंह साल 2004 में प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इन खराब हुए रिश्तों को सुधारने के लिए कदम आगे बढ़ाया. इस डील के लिए उन्हें यूपीए गठबंधन सरकार के सहयोगी लेफ्ट का कड़ा विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने का फैसला किया.

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आखिरकार अमेरिका से साथ ये ऐतिहासिक समझौता 2008 में हुआ. उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश थे. India-US Nuclear Deal भारतीय में ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई. इसके जरिए दशकों से भारत के लिए बंद परमाणु ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिकी सहयोग का रास्ता फिर से ओपन हो गया. 

तीसरा काम- Aadhaar बना हर भारतीय की पहचान
मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान ही आधार कार्ड अस्तित्व में आया और ये दिवंगत पूर्व पीएम की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक बना. गौरतलब है कि आधार कार्ड (Aadhaar Card) आज के समय में हर भारतीय की न केवल पहचान बन गया है, बल्कि तमाम फाइनेंशियल कामों के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण डॉक्युमेंट हो गया है.  जनवरी 2009 में देश के निवासियों को विशिष्ट पहचान प्रदान करने, विभिन्न सेवाओं तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए आधार कार्ड योजना की शुरुआत की गई थी.  

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