आज 2 अप्रैल है और रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) लागू होने की तारीख है. इस टैरिफ से दुनियाभर के बाजार सहमे हुए हैं और भारत में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स की मानें तो भारत भले ही Trump Tariff से सबसे प्रभावित होने वाले देशों में एक है, लेकिन ऑटो, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख सेक्टर आशंका से कहीं बेहतर स्थिति में नजर आ रहे हैं. जबकि, इस टैरिफ का सबसे बुरा असर परिधान (Apparel Sector) और Jewellery Sector पर हो सकता है.
ऑटो-फार्मा नहीं, यहां पड़ेगा ज्यादा असर
एमके रिसर्च (Emkay Research) के मुताबिक, भारत भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक हो और इससे भारत के ऑटो और फार्मा सेक्टर पर संभावित गहरे प्रभाव पर चर्चा हो रही है, लेकिन असली कमजोरी कहीं और है. एमके के मुताबिक, भारतीय परिधान क्षेत्र अमेरिकी बाजार में अधिक जोखिम में है. दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि भारत के कपड़ा निर्यात का फिलहाल सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका ही है और किसी भी तरह के टैरिफ से इस कारोबार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
इतना बड़ा है US में कारोबार
आंकड़ों को देखें, तो 2023-24 में भारत से लगभग 36 अरब डॉलर (करीब 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) के कपड़ा निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग 28 फीसदी या 10 अरब डॉलर (करीब 85,600 करोड़ रुपये) रहा है. इस सेक्टर में अमेरिका के साथ भारतीय कारोबार में लगातार इजाफा होता गया है.
साल 2016-17 और 2017-18 में भारत से कुल कपड़ा निर्यात में अमेरिकी हिस्सा 21 फीसदी से, साल 2019-20 में 25 फीसदी हुआ और 2022-23 में 29 फीसदी तक पहुंच गया था. रिपोर्ट की मानें तो भारत से कालीनों का 58%, अन्य निर्मित वस्त्रों का 50%, लेमिनेटेड वस्त्रों का 44% और बुने व गैर-बुने हुए कपड़ों के निर्यात का करीब 33% हिस्सा अमेरिका का था.
क्यों इस सेक्टर पर मंडरा रहा खतरा?
अब सबसे बड़ी बात ये कि अमेरिका को कपड़ा निर्यात पर भारत की निर्भरता, कपड़ा आयात के लिए अमेरिका की भारत पर निर्भरता के समान अनुपात में नहीं है. मतलब टैरिफ का सीधा असर भारत पर ही पड़ने वाला है और उसे इस सेक्टर में भारी नुकसान हो सकता है. आंकड़े देखें, तो साल 2024 में अमेरिका में कपड़ा आयात में भारत की हिस्सेदारी महज 6 फीसदी थी, जबकि चीन की हिस्सेदारी 21 फीसदी, वियतनाम की 19 फीसदी और बांग्लादेश की हिस्सेदारी 9 फीसदी थी.
10% पारस्परिक टैरिफ पर आधारित अनुमान
Emkay Research के अनुसार, भारत द्वारा आयात पर लगाए जाने वाले टैरिफ रेट को देखते हुए, अमेरिका को किए जाने वाले सभी भारतीय निर्यातों पर 10 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगेगा. इस हिसाब से टैरिफ सिम्युलेटर से पता चलता है कि अमेरिका को भारतीय निर्यात पर लगभग 10% का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाए जाने से भारत के अनुमानित CY26 अमेरिकी निर्यात में लगभग 5.9 अरब डॉलर (करीब 50,536 करोड़ रुपये) की कमी आएगी.