अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने रूस से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और कोयला का आयात बैन करने का निर्णय किया है. रूस के यूक्रेन पर आक्रमण (Russia Attack On Ukraine) के बीच उसकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करने के लिए अमेरिका ने ये फैसला किया है. अमेरिका समेत यूरोप के कई देश पहले ही उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध (Economic Sanctions) लगा चुके हैं.
जेलेंस्की ने की थी अमेरिका से रिक्वेस्ट
एपी की खबर के मुताबिक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के अधिकारियों से रूस से कच्चे तेल (Russia Crude Oil) का आयात रोकने का अनुरोध किया था. इसी के मद्देनजर अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए कच्चे तेल के साथ-साथ कोयला और प्राकृतिक गैस का आयात रोकने का भी निर्णय किया है.
BP नहीं खरीदेगी रूस से तेल
इस बीच दुनिया की बड़ी तेल और गैस कंपनियों में से एक BP और Shell ने घोषणा की है कि वो रूस से तेल और गैस की कोई नई खरीद नहीं करेंगी. हालांकि वो रूस से तत्काल तेल और गैस की खरीद नहीं रोक सकती हैं क्योंकि उनके रूस की कंपनियों के साथ लंबी अवधि के समझौते हैं. साथ ही इतनी जल्दी नए विकल्प ढूंढने में उन्हें परेशानी होगी.
बाइडेन सरकार का फैसला
एजेंसी ने बैन करने के फैसले की जानकारी रखने वाले एक शख्स के हवाले से खबर दी है कि बाइडेन बैन लगाने की घोषणा मंगलवार सुबह कर सकते हैं. इस मामले में अमेरिका अकेले आगे बढ़ सकता है, जबकि इसे लेकर वह यूरोपीय देशों के साथ लगातार चर्चा करता रहेगा. यूरोपीय देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर ज्यादा निर्भर करते हैं.
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने पहले ही रूस से तेल और गैस के आयात पर रोक लगाने के संकेत दे चुके हैं. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. ये 2008 के बाद कच्चे तेल का सबसे ऊंचा भाव है.
रूस ने दी थी ‘सप्लाई’ रोकने की धमकी
वहीं अमेरिका और यूरोपीय देशों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस ने सोमवार को इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया करते हुए धमकी दी कि वह यूरोप को गैस सप्लाई रोक देगा. इसी के साथ उसने कहा कि वह चाहे तो कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Price) को 300 डॉलर तक पहुंचा सकता है.
रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर एलेक्जेंडर नोवाक ने कहा था, ‘‘यह पूरी तरह से साफ है कि अगर रूसी तेल को रिजेक्ट किया गया तो ग्लोबल मार्केट पर इसके भयानक दुष्परिणाम होंगे. क्रूड ऑयल की कीमतों में ऐसी तेजी आएगी, जिसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता. यह ज्यादा नहीं भी चढ़ा तो भी 300 डॉलर प्रति बैरल हो जाएगा.'
ये भी पढ़ें: