प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्सनल ट्विटर अकाउंट (@narendramodi_in) को बुधवार देर रात को हैकर्स द्वारा हैक कर लिया गया. हैकर्स ने बिटकॉइन की मांग की. इसके पहले जुलाई में बराक ओबामा, एलन मस्क जैसी हस्तियों के अकाउंट हैक कर बिटक्वाइन की मांग की गई थी. आइए जानते हैं कि क्या होता है बिटकॉइन.
क्या होता है बिटकॉइन
बिटकॉइन (Bitcoin) एक क्रिप्टोकरेंसी है. इसे सातोशी नकामोति ने साल 2008 में बनाया था. आजतक यह नहीं पता चल पाया है कि सातोशी नकामोति कौन है? कोई इंसान है या संस्था? कहां का है? इसे पहली बार 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में जारी किया गया था. इसको कोई बैंक या सरकार कंट्रोल नहीं करती है. भारत में रिजर्व बैंक ने इसे मान्यता नहीं दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल करेंसी के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में लेन देन की इजाज़त दे दी है. यानी भारत में भी बिटकॉइन की खरीद-फरोख्त हो सकती है.
क्या होती है क्रिप्टो करेंसी
क्रिप्टो का मतलब ऐसी चीज जो रियल न हो. क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिद्म पर बनी होती है. यह सिर्फ इंटरनेट और कंप्यूटर पर उपलब्ध होती है. यह एक स्वतंत्र मुद्रा है, जिसका कोई मालिक नहीं होता. यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती. डिजिटल या क्रिप्टो करेंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करेंसी हैं. बिटकॉइन के अलावा दुनिया में सैकड़ों अन्य क्रिप्टो करेंसी भी मौजूद हैं जैसे- रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कॉइन, वॉइस कॉइन और मोनरो.
क्रिप्टोकरेंसी में रिटर्न यानी मुनाफा काफ़ी अधिक होता है, ऑनलाइन खरीदारी से लेन-देन आसान होता है. क्रिप्टो करेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है, इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता. साल 2009 में जब बिटकॉइन को लांच किया गया था तब उसकी वैल्यू 0 डॉलर थी. 2010 में भी इसकी वैल्यू 1 डॉलर तक नहीं पहुंची. लेकिन आज बिटकॉइन का रेट हजारों डॉलर में पहुंच गया है.
कैसे होता है बिटकॉइन से लेनदेन
बिटकॉइन (Bitcoin) के लेनदेन का एक लेज़र बनाया जाता है. दुनिया में लाखों व्यापारी भी बिटकॉइन से लेनदेन करते हैं. हालांकि किसी भी केंद्रीय बैंक ने अभी इसको मान्यता नहीं दी है. अमेरिका की कई दिग्गज कंपनियां भी बिटकॉइन को स्वीकार करती हैं. इंटरनेट की दुनिया में इसकी खरीद-फरोख्त कराने वाले कई एक्सचेंज हैं. इंटरनेट की कई वेबसाइट और ऐप के माध्यम से इसकी खरीद-फरोख्त होती है. इसमें खरीद-फरोख्त करने वालों की जानकारी छुपी रहती है.