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खाने-पीने की चीजों के दाम घटने से दिसंबर में थोक मुद्रास्फीति 1.22 प्रतिशत पर

दिसंबर में सब्जियों, खाने-पीने की वस्तुओं के दाम कम होने से थोक महंगाई दर में कमी आयी है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसके आंकड़े जारी किए.

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 दिसंबर में थोक मुद्रास्फीति 1.22 प्रतिशत पर ( फोटो : PTI)
दिसंबर में थोक मुद्रास्फीति 1.22 प्रतिशत पर ( फोटो : PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • खाद्य महंगाई 0.92 प्रतिशत पर
  • खुदरा मुद्रास्फीति में भी गिरावट
  • दिसंबर 2019 में थी 2.76 प्रतिशत

दिसंबर में सब्जियों, खाने-पीने की वस्तुओं के दाम कम होने से थोक महंगाई दर में कमी आयी है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को इसके आंकड़े जारी किए.

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कितनी रही थोक महंगाई
दिसंबर में थोक मूल्य सूचकांक (Whole Price Index-WPI) पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 1.22 प्रतिशत रही. नवंबर के महीने में यह 1.55 प्रतिशत पर थी. जबकि दिसंबर 2019 में थोक महंगाई 2.76 प्रतिशत पर थी.

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फूड इंडेक्स में भी महंगाई कम
दिसंबर में खाद्य वस्तुओं के दाम कम हुए हैं. इससे WPI Food Index में भी नरमी रही. दिसंबर में खाद्य मुद्रास्फीति दर घटकर 0.92 प्रतिशत रह गई. नवंबर के महीने में यह 4.27 प्रतिशत थी.

आलू, प्याज के दाम में कमी
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले ‘उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग’ (DPIIT) के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में सब्जियों के दाम में 13.2 प्रतिशत तक घटे. प्याज कीमतों में 54.69 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि नंवबर में प्याज 7.58 प्रतिशत सस्ता हुआ था.

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दिसंबर में आलू के दाम 37.75 प्रतिशत बढ़े, जबकि नवंबर में आलू 115.12 प्रतिशत महंगा हुआ था. इसके अलावा दिसंबर में मोटे अनाज, धान, गेहूं और दालों की मुद्रास्फीति भी नवंबर की तुलना में घट गई. हालांकि दिसंबर में फलों के थोक दाम नवंबर से अधिक थे.

ईंधन, बिजली महंगी
दिसंबर में ईंधन और बिजली खंड की महंगाई बढ़ी है. इस क्षेत्र में मुद्रास्फीति की दर में 3.18 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है. मुख्य तौर पर पेट्रोलियम और कोयले की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई. जबकि बिजली की दरें अपरिवर्तित रहीं.

खुदरा महंगाई भी नीचे आयी
दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति भी घटकर 4.59 प्रतिशत पर आ गई. इसकी वजह भी खाद्य वस्तुओं की कीमत घटना है. हालांकि पीटीआई की खबर के मुताबिक ’रेटिेंग एजेंसी इक्रा की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने मुख्य मुद्रास्फीति दर (मेन इन्फ्लेशल रेट) के 4.2 प्रतिशत पर बने रहने को लेकर चिंता व्यक्त की. यह इसका 24 माह का उच्च स्तर है.

 

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