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सब्जियों, फूड आइटम के दाम बढ़ने से अगस्त में बढ़ी थोक महंगाई, आलू की कीमत में 83% का इजाफा 

अगस्त में थोक महंगाई बढ़कर 0.16 फीसदी हो गई है. इससे पहले पिछले कई महीनों तक थोक मुद्रास्फीति निगेटिव दायरे यानी शून्य से नीचे रही थी. खाने-पीने के सामान और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट महंगे होने से अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़ी है.

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आलू जैसी सब्जियों के दाम बढ़ने से बढ़ी महंगाई
आलू जैसी सब्जियों के दाम बढ़ने से बढ़ी महंगाई
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अगस्त महीने में बढ़ गई थोक महंगाई
  • खाने-पीने के सामान के दाम बढ़े हैं
  • आलू के दाम में आई जबरदस्त बढ़त

आलू, टमाटर जैसी सब्जियों और फूड आइटम के दाम बढ़ने से अगस्त में थोक महंगाई बढ़कर 0.16 फीसदी हो गई है. इससे पहले पिछले कई महीनों तक थोक मुद्रास्फीति निगेटिव दायरे यानी शून्य से नीचे रही थी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है.

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खाने-पीने के सामान और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट महंगे होने से अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 0.16 फीसदी हो गई है. इससे पहले पिछले कई महीनों तक थोक मुद्रास्फीति नकारात्मक दायरे यानी शून्य से नीचे रही थी. अप्रैल में यह -1.57 फीसदी, मई में -3.37 फीसदी, जून में -1.81 फीसदी और जुलाई में -0.58 फीसदी रही थी. हालांकि, एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में महंगाई घटी है. एक साल पहले की इसी अवधि यानी अगस्त, 2019 में यह 1.17 फीसदी थी.

करीब 83 फीसदी बढ़ गया आलू का दाम 

अगस्त में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 3.84 फीसदी. इस दौरान आलू के दाम 82.93 फीसदी बढ़े. सब्जियों के दाम में आई महंगाई 7.03 फीसदी रही. हालांकि इस दौरान प्याज हालांकि 34.48 फीसदी सस्ता हुआ. अगस्त महीने में ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति घटकर 9.68 प्रतिशत रह गई. 

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जुलाई में आई थी गिरावट 

इसके पहले जुलाई महीने में थोक महंगाई में थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन तब भी खाने-पीने के सामान के दाम बढ़े थे. जुलाई महीने में थोक महंगाई दर निगेटिव 0.58 फीसदी पर रही, जो जून में नकारात्मक 1.81 फीसदी थी. वहीं पिछले साल यानी जुलाई 2019 में यह 1.17 फीसदी थी. खाद्य वस्तुओं की महंगाई जुलाई के दौरान 4.08 फीसदी थी. यह आंकड़ा जून में 2.04 फीसदी था. 

आगे और बढ़ेगी महंगाई 

भारतीय रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले महीनों में महंगाई अभी और बढ़ेगी. रिजर्व बैंक की 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर 6.93 फीसदी पर पहुंच गई थी. 

जून महीने में खुदरा महंगाई दर 6.23 फीसदी थी. जून के बाद जुलाई में भी खुदरा महंगाई दर के आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा तय सुविधाजनक दायरे से बाहर हो चुके हैं. जुलाई में खाद्य महंगाई यानी कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स बढ़कर 9.62 फीसदी पर पहुंच गई. रिजर्व बैंक का कहना है कि कोरोना संकट और खाद्य तथा मैन्युफैक्चर्ड सामान की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से अगले महीनों में महंगाई और बढ़ेगी. 

 

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