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बिजनेस

ये 16 कंपनियां चलाना चाहती हैं प्राइवेट ट्रेनें, टाटा-अडानी रेस में नहीं!

ये 16 कंपनियां चलाना चाहती हैं प्राइवेट ट्रेनें, टाटा-अडानी रेस में नहीं!
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रेलवे में निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने एक और कदम बढ़ा दिया है. सरकार का कहना है कि निजी कंपनियों की रेलवे में भागीदारी से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, और रेलवे में बड़ा निवेश आएगा. सरकार को निजी कंपनियों के जरिये अब रेलवे में बेहतरी की उम्मीद है. (Photo: File)
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प्राइवेट कंपनियों के साथ रेलवे की बैठक

रेल मंत्रालय ने कुछ दिन पहले ही 109 जोड़ी रूटों पर 151 प्राइवेट ट्रेनें चलाने के लिए निजी कंपनियों से रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशन (RFQ) मांगा था, कई बड़ी कंपनियां रेल चलाने को इच्छुक दिख रही हैं. 21 जुलाई को रेलवे ने इच्छुक निजी कंपनियों के लिए एक प्री-बिड (बोली लगाने के पूर्व) कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. जिसमें प्राइवेट ट्रेन चलाने की इच्छुक 16 कंपनियों भाग लीं. इसके लिए रेलवे ने 12 आवेदन आमंत्रित किए थे. (Photo: File)
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ये कंपनियां चलाना चाहती हैं यात्री ट्रेनें

सूत्रों के मुताबिक 16 निजी कंपनियों में से 11 कंपनियों ने प्राइवेट ट्रेन के परिचालन बोली में हिस्सा लिया. कई बड़ी कंपनियों के नाम सामने आए हैं, जिसमें IRCTC प्रमुख है. इसके अलावा जीएमआर समूह (The GMR group), बॉम्बार्डियर इंडिया (Bombardier India), सीएएफ, राइट्स (RITES), भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL), मेधा समूह, आरके एसोसिएट्स, स्टरलाइट पावर, भारत फोर्ज और जेकेबी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.
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कंपनियों ने उठाए कुछ सवाल

रेलवे के मुताबिक प्राइवेट ट्रेन चलाने की इच्छुक कंपनियां अपनी पसंद से ट्रेन खरीद सकेंगी या लीज पर ले सकेंगी. बैठक में संभावित आवेदकों द्वारा उठाए गए मुद्दों और चिंताओं पर चर्चा की गई. बैठक में प्राइवेट कंपनियों के कुछ सवालों के जवाब रेल मंत्रालय और नीति आयोग ने दिए. रेल मंत्रालय 31 जुलाई, 2020 तक प्राइवेट कंपनियों के हर सवाल का लिखित उत्तर देगा.
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12 अगस्त को होने वाली है दूसरी बैठक

दूसरा आवेदन पूर्व सम्मेलन 12 अगस्त 2020 को निर्धारित है. निजी ट्रेन चलाने को लेकर कंपनियां 8 सितम्बर तक आवेदन कर सकती हैं. हालांकि पहली प्री बिड मीटिंग में टाटा, अडानी ग्रुप और स्पेनिश टैल्गो जैसी कंपनियों ने हिस्सा नहीं लिया है. लेकिन अभी भी इन कंपनियों के लिए मौके हैं.


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रेलवे के अनुमान के मुताबिक जिन 12 क्लस्टर के लिए निजी कंपनियों के साथ समझौता होना है, उनपर ट्रेन चलाने से औसतन करीब 20% का फायदा होगा. रेलवे ने बेंगलुरु, चंडीगढ़, हावड़ा, जयपुर, पटना, प्रयागराज, सिकंदराबाद, चेन्नई के आलावा दिल्ली और मुम्बई को दो-दो क्लस्टर में बांटा है.

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रेलवे में आएगा बड़ा निवेश

भारतीय रेलवे का अनुमान है कि निजी कंपनियों की भागीदारी से रेलवे में 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा. रेलवे की कोशिश राजस्व बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर है.

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कब से चलेंगी प्राइवेट ट्रेनें?

इसको लेकर मीडिया में अलग-अलग तरह की खबरें चल रही थीं. जिसपर विराम लगाते हुए रेलवे से साफ कर दिया है कि ये हाईटेक ट्रेनें मार्च 2023 से पटरी पर दौड़ने लगेंगी. यानी 2023 से निजी ट्रेनों से चलेंगी.
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फ्लाइट जैसी होंगी सुविधाएं

प्राइवेट ट्रेनों में एयरलाइन्स की तरह यात्रियों को पसंदीदा सीट, सामान और यात्रा की सुविधाएं दी जाएंगी. इस दौरान यात्रियों को इन सुविधाओं के लिए टिकट के अलावा अलग से भुगतान करना पड़ सकता है. इसका मकसद भारतीय रेल में नई तकनीक का विकास करना है ताकि मेंटेनेंस कॉस्ट को कम किया जा सके. सेफ्टी का भरोसा मजबूत होगा और यात्रियों को वर्ल्ड क्लास ट्रैवल का अनुभव होगा. (Photo: File)
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ट्रेन की खासियत

प्रत्येक ट्रेन में कम से कम 16 डिब्बे होंगे. रेलवे के अनुसार, इनमें से ज्यादातर आधुनिक ट्रेनों का निर्माण भारत में 'मेक इन इंडिया' के तहत होगा और इसे चलाने वाले प्राइवेट कंपनी ही उसके मेंटेनेंस, खरीद और ट्रांसपोर्टेशन के लिए जिम्मेदार होगी. (Photo: File)
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क्या होगी रफ्तार?

ट्रेनों के डिजाइन इस रूप से होंगे कि वे 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सके. रेलवे के अनुसार परियोजना के लिए छूट अवधि 35 साल होगी. ट्रेनों को चलाने वाला प्राइवेट यूनिट, भारतीय रेलवे को ढुलाई शुल्क, वास्तविक खपत के आधार पर बिजली का पैसा देगा. (Photo: File)
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इंडियन रेलवे के रेल नेटवर्क पर पैसेंजर ट्रेनों को चलाने के लिए प्राइवेट इंवेस्टमेंट के लिए उठाया जाने वाला यह पहला कदम है. फिलहाल आईआरसीटीसी तीन ट्रेनों का परिचालन करता है, जिसमें वाराणसी-इंदौर मार्ग पर काशी-महाकाल एक्सप्रेस, लखनऊ-नई दिल्ली तेजस और अहमदाबाद-मुंबई तेजस एक्सप्रेस शामिल है. (Photo: File)
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