केंद्र सरकार का प्लान है कि देश में सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर 5 कर दी जाए. इससे पहले सरकार ने अप्रैल में 10 बैंकों का विलय करके 4 बैंक बना दिए. अब खबर है कि सरकार 4 और बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. (Photo: File)
दरअसल रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक, आईडीबीआई और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस वित्त वर्ष में ही इन चारों बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी कम करने के लिए कदम उठाएं. (Photo: File)
एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि इस मामले से जुड़े दो अधिकारियों ने बताया कि इन चारों बैंकों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है, और विनिवेश के जरिये सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचने का योजना बना रही है. (Photo: File)
दरअसल कोरोना संकट की वजह से विनिवेश के लक्ष्य को झटका लगा है. लेकिन अब सरकार ने इस मोर्चे पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है. सरकार धन जुटाने के मकसद से बैंकों और अन्य सरकारी कंपनियों के निजीकरण पर जोर दे रही है. साथ ही ये बैंक लगातार घाटे में चल रहे हैं, जिससे सरकार को नुकसान हो रहा है. (Photo: File)
इसके अलावा केंद्र सरकार हर हाल में बैंकिंग सेक्टर में सुधार लाना चाहती है. इसके लिए PMO ने इसी महीने की शुरुआत में वित्त मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखकर निजीकरण का प्रक्रिया में तेजी लाने का सुझाव दिया था. सरकार का मानना है कि जितने अधिक बैंक होते हैं, फर्जीवाड़े के मामले उतने अधिक सामने आते हैं. (Photo: File)
इसी कड़ी में पिछले दिनों नीति आयोग ने सरकार से सिफारिश की थी कि वह तीन सरकारी बैंकों का निजीकरण कर दे. नीति आयोग का कहना है कि सरकार पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र प्राइवेट के हाथों में सौंप दे. (Photo: File)
गौरतलब है कि भारत सरकार अपने आधे से भी अधिक पब्लिक सेक्टर बैंकों की हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है, जिसकी शुरुआत बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक के अपने शेयर्स बेचने से हो सकती है. (Photo: File)