किसी भी देश की आर्थिक गतिविधियों की स्थिति का अनुमान ईंधन की खपत से लगाया जाता है. भारत में मई के मुकाबले जून में ईंधन की खपत बढ़ी थी. उम्मीद की जा रही थी कि जुलाई में और बेहतर आंकड़े आएंगे. लेकिन जून के मुकाबले जुलाई में ईंधन की मांग में गिरावट देखने को मिली है. (Photo: File)
दरअसल कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से अप्रैल में ईंधन की मांग में भारी गिरावट आई थी. अप्रैल महीने में ईंधन खपत में 45 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. क्योंकि लॉकडाउन की वजह से औद्योगिक गतिविधियां बंद थीं. (Photo: File)
लेकिन अब जुलाई 2020 में ईंधन खपत गिरकर 15.67 मिलियन टन पर आ गई. जुलाई- 2019 की तुलना 11.7 फीसदी की गिरावट आई है, पिछले साल समान अवधि में 17.75 मिलियन टन ईंधन की खपत हुई थी. (Photo: File)
जून के मुकाबले जुलाई में आई गिरावट चिंता का विषय है. जून- 2020 में देश में 16.24 मिलियन टन ईंधन की खपत हुई थी. जबकि जुलाई में घटकर 15.67 मिलियन टन हो गई. पिछले महीने की तुलना ईंधन की खपत में 3.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. (Photo: File)
देश की कुल ईंधन खपत में करीब 2/5 हिस्सा परिवहन और सिंचाई में डीजल का होता है. इस क्षेत्र में जुलाई- 2020 में एक साल पहले की तुलना में डीजल की खपत 19.25 फीसदी गिरकर 5.52 मिलियन टन ईंधन रही. (Photo: File)
वहीं, पेट्रोल की मांग जुलाई महीने में एक साल पहले की तुलना में 10.3 फीसदी गिरकर 2.26 मिलियन टन रही. बता दें कि जून महीने में पेट्रोल की मांग 2.28 मिलियन टन रही थी, जबकि जुलाई में 0.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. (Photo: File)