टेलीकॉम कंपनियों के लिए 14 फरवरी यानी शुक्रवार का दिन बुरा रहा. दरअसल, देश की टॉप टेलीकॉम कंपनियों को आज यानी शुक्रवार की रात 12 बजे से पहले एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर का बकाया चुकाना होगा.
अगर ऐसा नहीं किया तो इन कंपनियों पर सरकार की ओर से बड़ी कार्रवाई हो सकती है. वहीं अगर टेलीकॉम कंपनियों ने एजीआर की बकाया रकम का भुगतान कर दिया तो उनकी आर्थिक हालत बिगड़ जाएगी. ऐसे में सबसे बड़ा संकट टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया के सामने खड़ा होने वाला है.
वोडाफोन-आइडिया पर सबसे ज्यादा असर
पहले से ही घाटे में चल रही वोडाफोन-आइडिया को ब्याज और जुर्माने समेत 50 हजार करोड़ से अधिक चुकाना है. चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में वोडाफोन-आइडिया को 6,438.8 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. इस तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय साल भर पहले के 11,982.8 करोड़ रुपये से पांच प्रतिशत कम होकर 11,380.5 करोड़ रुपये पर आ गई है.
यहां बता दें कि वोडाफोन-आइडिया को सितंबर तिमाही में 50,922 करोड़ रुपये का
भारी-भरकम घाटा हुआ था. इस तिमाही में वोडाफोन-आइडिया ने एजीआर बकाया देने के
लिए प्रावधान किया था. इन हालातों में वोडाफोन-आइडिया का शेयर भाव और मार्केट कैपिटल भी अपने ऑल टाइम लो लेवल पर है. वहीं एक्सपर्ट मानते हैं कि वोडाफोन-आइडिया के इस संकट की वजह से बेरोजगारी बढ़ेगी तो वहीं बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज भी डूबेंगे.
बहरहाल, बिना ब्याज और जुर्माने के एयरटेल
को 21,682.13 करोड़ रुपये, वोडाफोन को 19,823.71 करोड़, रिलायंस
कम्युनिकेशंस को 16,456.47 करोड़ रुपये और बीएसएनएल को 2,098.72 करोड़
रुपये देने हैं. वहीं अगर ब्याज और जुर्माने की रकम को जोड़ लें तो ये
बकाया 2 लाख करोड़ के पार हो जाएगा.
क्या है AGR का विवाद?
दरअसल, टेलीकॉम कंपनियों से टेलीकॉम डिपार्टमेंट एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) मांग रहा है. एजीआर, संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है. इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है. सरकार की इस मांग के खिलाफ टेलीकॉम कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
कोर्ट ने भी सरकार की मांग को जायज ठहराया. सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर,
2019 के अपने आदेश में टेलीकॉम कंपनियों को 23 जनवरी 2020 तक की मोहलत दी
थी.
इस डेडलाइन पर रिलायंस जियो ने भुगतान तो कर दिया लेकिन अन्य टेलीकॉम
कंपनियां एक बार फिर मोहलत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट चली गई थीं.
हालांकि, अब कोर्ट ने एक बार फिर याचिका खारिज कर दी है.
याचिका खारिज करने के बाद एयरटेल ने 20 फरवरी तक 10 हजार करोड़ रुपये देने की पेशकश की है. बहरहाल, देखना अहम है कि टेलीकॉम कंपनियां आज रात तक बकाया चुका पाती हैं या नहीं.