ऊंचे बजट घाटे को लेकर चिंतित वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने राजकोषीय स्थिति सुदृढ करने की एक पंचवर्षीय वृहद योजना प्रस्तुत की. उम्मीद है कि इससे निवेश को बढ़ावा मिलने, मुद्रास्फीति अंकुश और आर्थिक वृद्धि दर तेज करने में मदद मिलेगी.
चिदंबरम ने कहा कि इस योजना के तहत 2016-17 तक राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत पर लाने का प्रयास करेगी. वित्त मंत्री को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकले घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.3 प्रतिशत के अंदर रहेगा. 2011-12 में यह 5.8 प्रतिशत था.
उन्होंने कहा, ‘राजकोषीय स्थिति मजबूत होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है. ऐसी उम्मीद है कि इससे अर्थव्यवस्था तेज निवेश, उंची वृद्धि दर, नरम मुद्रास्फीति और दीर्घकालीन टिकाउपन के रास्ते पर लौटेगी.’
उल्लेखनीय है कि 2011-12 में आर्थिक वृद्धि दर घटकर नौ साल के निचले स्तर 6.5 प्रतिशत पर आ गई एवं इसमें और गिरावट आने की संभावना है. वर्ष 2012-13 में राजकोषीय स्थिति मजबूत करने के संदर्भ में चिदंबरम ने भरोसा जताया कि सरकार विनिवेश से 30,000 करोड़ रुपये और स्पेक्ट्रम की बिक्री से 40,000 करोड़ रुपये जुटाने में समर्थ होगी.
राजस्व लक्ष्य के संबंध में उन्होंने कहा, ‘कर प्राप्तियों के तहत बजट में तय किए गए राजस्व लक्ष्य को प्राप्त करने के हर प्रयास किए जाएंगे. सरकार को उम्मीद है कि योजनागत एवं गैर योजनागत खर्चों पर भी अंकुश लगेगा.’
उन्होंने कहा, ‘जहां आवश्यक खर्चों विशेषकर पूंजीगत खर्चों के लिए पैसा उपलब्ध कराया जाएगा, फिजूलखर्ची से बचने के हर प्रयास किए जाएंगे.’
सरकार ने वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में राजकोषीय घाटा 5.1 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है पर सोमवार को पेश की गई रूपरेखा के मुताबिक, इसके जीडीपी के 5.3 प्रतिशत पर पहुंचने की संभावना है.
चिदंबरम ने कहा, ‘5.1 प्रतिशत बहुत चुनौतीपूर्ण है. सभी कारकों पर नजर डालने के बाद हमें लगता है कि यह 5.3 प्रतिशत रहेगा और हम इसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे.’
उन्होंने कहा, ‘यह योजना आवश्यक है. इसे अवश्य लागू किया जाना चाहिए और सरकार चालू वित्त वर्ष में इसे लागू करने को लेकर बहुत गंभीर है.’
रूपरेखा में विजय केलकर समिति की सिफारिशों को अपनाया गया है जिसमें समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार को सुधार की पहल करनी चाहिए, विनिवेश कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहिए और सब्सिडी घटानी चाहिए जिसके बगैर राजकोषीय घाटा 2012-13 में बढ़कर 6.1 प्रतिशत पर पहुंच सकता है.
चिदंबरम ने कहा कि सरकार चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटा की दोहरी चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए संकल्पबद्ध है. उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा चालू वित्त वर्ष में घटकर 70.3 अरब डॉलर या जीडीपी के 3.7 प्रतिशत पर लाए जाने की संभावना है जो वित्त वर्ष 2011.12 में 78.2 अरब डॉलर या जीडीपी का 4.2 प्रतिशत था.
चिदंबरम ने कहा, ‘सरकार को भरोसा है कि पूंजी प्रवाह बढ़ने से चालू खाता घाटा का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा और इसका एक अहम हिस्सा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, एफआईआई और ईसीबी के जरिए आने की संभावना है.’
प्रत्यक्ष कर संहिता के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि इसकी समीक्षा की जा रही है और संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों पर गौर करने के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा.
उन्होंने कहा, ‘हम मौजूदा आर्थिक स्थिति को भी देख रहे हैं और इसलिए संसद में पेश होने वाले विधेयक के अंतिम संस्करण में यह परिलक्षित होगा. कुल मिलाकर हमें स्थायी समिति की सिफारिशों को मानना होगा.’