सजावटी सांप और दुर्लभ छोटी छिपकली विलुप्त होने के डर से जहां ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने भारतीय माइनिंग कंपनी अडानी की परियोजना को रोक दिया है उससे अब लगभग साफ हो चुका है कि अडानी का ऑस्ट्रेलिया ड्रीम प्रोजेक्ट विवादों की भेंट चढ़ने को तैयार है. इस फैसले के तुरंत बाद अडानी को एक और तगड़ा झटका लगा. अडानी प्रोजेक्ट में वित्तीय सलाहकार की भूमिका निभा रहे सबसे बड़े आस्ट्रेलियाई बैंक ने भी अब इस परियोजना में अपनी भूमिका अदा करने से मना कर दिया है.
गौरतलब है कि आस्ट्रेलिया के एक बैंक ने संघीय अदालत द्वारा क्वींसलैंड में समूह की विवादास्पद 16 अरब डालर की कोयला खनन परियोजना की पर्यावरण मंजूरी रद्द करने के एक दिन बाद, इसके वित्तीय सलाहकार की भूमिका निभाने से इनकार कर दिया.
ऑस्ट्रेलिया बैंक ने छोड़ा अडानी का साथ
देश के सबसे बड़े बैंक, कॉमनवेल्थ बैंक आफ आस्ट्रेलिया (सीबीए) ने कहा कि इसकी परामर्श की भूमिका खत्म हो गई है. एक अखबार द एज ने बैंक के प्रवक्ता के हवाले से कहा अडानी के विभिन्न किस्म की मंजूरी हासिल करने के लिए इस परियोजना पर नए सिरे से ध्यान देने के मद्देनजर वित्तीय परामर्श की जिम्मेदारी खत्म हो गई है.
बैंक ने परामर्श संबंधी समझौते से बाहर निकलने के संबंध में और कोई ब्योरा नहीं दिया लेकिन सूत्रों का कहना है कि कारमाइकल खनन परियोजना से जुड़े पर्यावरण विवाद और कोयले की गिरती कीमत के बीच इसका वित्तीय जोखिम चिंता का विषय है.
परियोजना से विलुप्त हो सकते हैं छिपकली और सांप
सीबीए का यह फैसला अदालत द्वारा कारमाइकल परियोजना को दी गई पर्यावरण मंजूरी रद्द करने के ठीक बाद आया है. अदालत ने यक्का स्किंक (छोटी छिपकली) और सजावटी सर्प प्रजातियों के विलुप्त होने के खतरे से जुड़े विवाद के मद्देनजर इस परियोजना के कार्यान्वयन को रोक दिया है.
ऑस्ट्रेलिया की ग्रीन्स पार्टी कर रही विरोध
इस बीच आस्ट्रेलियन ग्रीन्स पार्टी ने सीबीए के अडाणी के साथ गठजोड़ तोड़ने का स्वागत किया. आस्ट्रेलियन ग्रीन्स की उप नेता और जलवायु प्रवक्ता लैरिसा वाटर्स ने कहा गैलिली बेसिन में कोयला खनन न सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से गैरजिम्मेदाराना है बल्कि यह आर्थिक रूप से भी व्यावहारिक नहीं है.
क्या है अडानी की ऑस्ट्रेलिया माइनिंग प्रोजेक्ट
अडानी ग्रुप को अपने माइनिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत करने के लिए गलीली बेसिन में स्थित कारमाइकेल कोयला खदानों के लिए भूमि-अधिग्रहण करना था. इस क्षेत्र में जमीनों का मालिकाना हक क्वींसलैंड के क्षेत्रीय वांगन और जगलिंगउ लोगों को है. अडानी समूह ने क्षेत्रीय लोगों से जमीन अधिग्रहित करने के लिए लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया से गुजर रही था. क्षेत्रीय नियमों के मुताबिक वहां कि सरकार को लोगों से जमीन लेकर अदानी को माइनिंग लीज देना था.