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जेटली बोले- तमिलनाडु को छोड़कर सभी राज्यों ने किया जीएसटी का समर्थन

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मंगलवार को कहा कि तमिलनाडु को छोड़कर एक तरह से सभी राज्यों ने जीएसटी के विचार का समर्थन किया है. जीएसटी पर राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की बैठक के बाद उन्होंने यह बात कही.

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वित्त मंत्रियों की बैठक में बोले जेटली- जीएसटी पर मिलेगा सबका साथ
वित्त मंत्रियों की बैठक में बोले जेटली- जीएसटी पर मिलेगा सबका साथ

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वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मंगलवार को कहा कि तमिलनाडु को छोड़कर एक तरह से सभी राज्यों ने जीएसटी के विचार का समर्थन किया है. तमिलनाडु को इसको लेकर कुछ आपत्तियां हैं.

जीएसटी के अमल में समयसीमा नहीं
जीएसटी पर राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की बैठक के बाद उन्होंने यह बात कही. उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अमल के लिए कोई समयसीमा जैसी बात नहीं है. यह राज्य और केंद्र स्तर पर लगने वाले विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को स्वयं में समाहित करेगा. इससे पहले, सरकार ने एक अप्रैल 2016 से देशव्यापी एकल कर व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कांग्रेस पार्टी के विरोध के कारण जीएसटी पर संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में अटका हुआ है.

दूर की जाएंगी तमिलनाडु सरकार की आपत्तियां
दो दिवसीय बैठक के पहले दिन जेटली ने कहा , ‘तमिलनाडु को छोड़कर एक तरह से सभी राज्यों ने आज जीएसटी के विचार का समर्थन किया. तमिलनाडु की आपत्ति है और उसने कुछ सुझाव दिया है जिसे समिति ने नोट किया है.’ उन्होंने कहा कि बैठक में वित्त मंत्रियों की रिकार्ड उपस्थिति रही और हर राज्य ने जीएसटी पर विस्तृत विचार रखे.

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बैठक में शामिल हुए सभी राज्यों के प्रतिनिधि
बैठक में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के मुख्यमंत्रियों के साथ दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री समेत 22 राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हुए. इसके अलावा सात अन्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए. बैठक में जीएसटीएन के चेयरमैन और राजस्व सचिव हसमुख अधिया भी मौजूद थे.

राज्यसभा में अटका है जीएसटी बिल
जेटली ने कहा कि पहले पांच साल के लिए राजस्व के नुकसान को लेकर राज्यों की शंकाओं का समाधान कर दिया गया है. लोकसभा ने जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जबकि यह राज्यसभा में लंबित है. गौरतलब है कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंगलवार को दिल्ली में बैठक होने वाली है.

विधेयक पारित होने के बाद राज्य लगाएंगे मुहर
उन्होंने कहा, ‘पहली चीज जो हमें करनी होगी वह है संविधान संशोधन विधेयक को पारित करना. इसके बाद राज्यों को भी उस पर अपनी मुहर लगानी है. उसके बाद संसद को केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) विधेयक और राज्यों को राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) विधेयकों को पारित करना होगा.’

नुकसान की भरपाई करेगा केंद्र
उन्होंने कहा, ‘केंद्र नुकसान की भरपाई करेगा और चिंता का कोई कारण नहीं होना चाहिए.’ जीएसटी दर की संवैधानिक सीमा के जटिल मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कहा, ‘इस पर पूरी तरह आम सहमति है, ऐसी कोई संवैधानिक सीमा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में इसको लेकर कोई जरूरत हो सकती है. अब इसे जीएसटी परिषद पर छोड़ दिया गया है.’

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खपत आधारित कर है जीएसटी
उत्पादक राज्यों की एक प्रतिशत अतिरिक्त कर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केंद्र इस मामले में लचीला रूख अपनाए हुए है. चूंकि जीएसटी खपत आधारित कर है, उत्पादक राज्य अतिरिक्त कर की मांग करते रहते हैं. भविष्य की रूपरेखा के संदर्भ में जेटली ने कहा, ‘हम संसद के मानसून सत्र में संविधान संशोधन को लाने की भरसक कोशिश करेंगे.

मुख्य आर्थिक सलाहकार देंगे राजस्व निरपेक्ष दर की जानकारी
उन्होंने कहा कि सत्र के बाद सीजीएसटी और एसजीएसटी विधेयकों को पारित किया जाएगा. राजस्व निरपेक्ष दर (आरएनआर) के आकलन के बारे में उन्होंने कहा कि मित्रा जुलाई में अधिकार प्राप्त समिति की बैठक बुलाएंगे. उसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार इस बारे में चीजों को रखेंगे.

जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी अगली बैठक
केंद्र और राज्यों के कर दरों पर दोहरे नियंत्रण के बारे में जेटली ने कहा कि यह भी समिति देखेगी कि यह सौहार्दपूर्ण हो और कोई विरोध नहीं हो. इस बारे में अगली बैठक में फिर से चर्चा की जाएगी. मित्रा ने कहा कि अगली बैठक जुलाई के दूसरे सप्ताह में हो सकती है.

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