बीते 5 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट पेश करते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल के बढ़ावे पर जोर दिया. इसके साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया लेकिन बजाज ऑटो के MD राजीव बजाज सरकार के इस कदम से इत्तेफाक नहीं रखते हैं. राजीव बजाज के मुताबिक इलेक्ट्रिक व्हीकल पर सरकार की योजना व्यवहारिक नहीं है. हालात ऐसे बन रहे हैं कि ऑटो मेकर्स को अपनी दुकान बंद करने की नौबत आ सकती है.
इकोनॉमिक्स टाइम्स को दिए इंटरव्यू में राजीव बजाज ने कहा, ''सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल पर ऑटो मेकर्स कंपनियों ने कोई फैसला नहीं दिया है. चाहें आप एक OEM (मूल उपकरण निर्माता) या एक स्टार्टअप हैं, आप सिर्फ अपनी क्षमताओं के अनुसार वाहन बना सकते हैं. ''
रातोंरात सब कुछ करने की होती है कोशिश
राजीव बजाज ने सरकार के इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री के विस्तार पर भी सवाल खड़े किए. राजीव बजाज का मानना है कि हमारे देश में रातोंरात सब कुछ करने की कोशिश की जाती है और यही वजह है कि कई योजनाएं ढंग से लागू नहीं हो पाती हैं. उन्होंने कहा, ''वर्तमान में इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री का आकार 1 फीसदी से भी कम का है. मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि कैसे सिर्फ 6 साल में इंडस्ट्री का विस्तार 100 फीसदी तक का हो जाएगा. सरकार की यह कल्पना समझ से परे है. ''
ग्राहक को तय करने देंइसके साथ ही राजीव बजाज ने Internal Combustion इंजन वाली कारों के प्रतिबंध को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने पूछा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल के बढ़ावा के साथ दूसरी टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है? उन्होंने कहा, '' जब इंडिगो या जेट एयरवेज जैसी एयरलाइन शुरू होती हैं, तो क्या आप इंडियन एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगा देते हैं? अगर 4जी नेटवर्क आता है तो क्या आप 2जी पर प्रतिबंध लगाते हैं? सही या गलत का फैसला ग्राहक को तय करने दें.'' दरअसल, 1 अप्रैल 2020 से भारत में BS-IV मानक यानी भारत स्टेज IV मानक इंजन वाले वाहनों की बिक्री पर रोक लगाई जाने वाली है. राजीव बजाज का इशारा इन्हीं प्रतिबंधों की ओर है.
क्या हम दुकान बंद कर दें?
इंटरव्यू के दौरान राजीव बजाज ने सरकार से भी तीखे सवाल किए. उन्होंने कहा, '' मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि अगर कल को ग्राहक आपके इस मॉडल स्वीकार नहीं करते हैं, तो ऑटो इंडस्ट्री का क्या होगा? कहने का मतलब यह है कि आपने आईसी इंजन बंद कर दिया है. इससे जुड़े लोगों की नौकरियां खत्म हो रही हैं. इलेक्ट्रिक व्हीकल की बिक्री नहीं हो रही है. ऐसे में हम क्या करें? क्या हम दुकान बंद कर, घर बैठ जाएं?''
'बेहतर' की बजाए 'अच्छा'
हालांकि राजीव बजाज ने यह भी कहा कि हमें इलेक्ट्रिक व्हीकल के प्रोत्साहन से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन इसे बेहतर विकल्प कहना गलत है. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल को 'बेहतर' की बजाए 'अच्छा' कहना सही रहेगा. राजीव बजाज ने कहा कि भारत में 99 फीसदी इलेक्ट्रिक व्हीकल के सेलर्स चीन से वाहनों को ला रहे हैं और इसके जरिए चीन में नौकरियां पैदा हो रही हैं. राजीव बजाज ने कहा, '' हम इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए चीन पर निर्भर हैं. हम वो व्यापारी हैं जो चीन को वहां से वाहन लाकर और इस बाजार में डंप करके रोजगार दे रहे हैं.''
बजट में EV पर कई बड़े ऐलान
हाल ही में आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं. मसलन, इलेक्ट्रिक व्हीकल पर GST को 12 फीसदी के स्लैब से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है. इसके साथ ही बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल की खरीद पर 1.5 लाख रुपये तक के लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर अतिरिक्त इनकम टैक्स छूट भी देने की बात कही गई. यही नहीं, इलेक्ट्रिक व्हीकल के पार्ट से कस्टम ड्यूटी भी हटा दी गई है.वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद और इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की चार्जिंग प्वाइंट लगाने पर भी रियायत देने की योजना है.
सरकार का क्या है तर्क
इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ाव देने के पीछे सरकार की ओर से भी तर्क दिए गए हैं. हाल ही में इंडिया टुडे के खास कार्यक्रम 'बजट राउंडटेबल' में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने के 3 सटीक कारणों के बारे में बताया. निर्मला सीतारमण के मुताबिक, ''आज देश पूरी तरह से पेट्रोल और डीजल पर निर्भर है, इससे आजादी मिल जाएगी. वहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल के प्रचलन बढ़ने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट और बेहतर हो जाएगी. इसके अलावा अगर भारत में ई-व्हीकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जगह ले लेता है तो ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ हम दूसरे देशों से आंखें मिला पाएंगे.''