देश के ऑटो सेक्टर की हालत करीब एक साल से खराब है.ऑटो सेक्टर में महीनों से जारी मंदी की वजह से कंपनियों को उत्पादन बंद करना पड़ा और बड़े पैमाने पर छंटनी हुई है. आगे इस सेक्टर की गाड़ी किस तरह से रफ्तार पकड़ेगी, इसके लिए इस सेक्टर के दिग्गजों की नजर अगले बजट और वित्त मंत्री के भाषण पर होगी. आइए जानते हैं कि आखिर ऑटो सेक्टर सुधार के लिए वित्त मंत्री से इस बार यानी 2020-21 के बजट में क्या चाहता है.
साहसिक सुधारों की दरकार
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से कहा कि ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार से मांग की है कि इस सेक्टर को संकट से उबारने के लिए साहसिक वित्तीय कदम उठाए जाएं. साल 2019 के दौरान ऑटो सेक्टर की बिक्री में दो दशकों की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है.
ये हैं इंडस्ट्री की प्रमुख मांगें
ऑटो लोन के ब्याज पर मिले इनकम टैक्स छूट
इंडस्ट्री यह भी मांग कर रही है कि होम लोन की तर्ज पर ऑटो लोन पर भी चुकाए जाने वाले ब्याज के बदले इनकम टैक्स में छूट दिया जाए ताकि लोग वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित हों.BS-VI वाहनों पर घटे जीएसटी
सूत्रों के मुताबिक BS-VI उत्सर्जन मानक लागू करना उत्सर्जन में कटौती की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इस पहल से वाहनों की लागत 8 से 10 फीसदी बढ़ गई है. यह अलग बात है कि इससे सरकार को जीएसटी ज्यादा मिल रहा है. इस अतिरिक्त लागत की वजह से कारों की मांग में और कमी आई है. ऑटो इंडस्ट्री सरकार से यह मांग कर रही है कि अप्रैल के बाद BS-VI वाहनों पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाए.
गौरतलब है कि जीएसटी दरें घटाने का निर्णय जीएसटी काउंसिल करता है और यह बजट से सीधे जुड़ा हुआ नही है, लेकिन वित्त मंत्री इसका संकेत दे सकती हैं.
लीथियम ऑयन बैटरी सेल पर आयात कर खत्म हो
ऑटो इंडस्ट्री की दूसरी प्रमुख मांग लीथियम ऑयन बैटरी सेल पर आयात कर खत्म करना है ताकि बैटरी पैक का निर्माण देश में ही हो सके और देश में सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाए जा सकें. इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत घटेगी और देश में हरित यातायात को बढ़ावा मिल सकेगा.
शहरी विकास मंत्रालय को मिले पर्याप्त बजट
इंडस्ट्री की यह भी मांग है कि शहरी विकास मंत्रालय को पर्याप्त बजट मुहैया कराया जाए ताकि राज्य परिवहन और अन्य सार्वजनिक यातायात को बढ़ावा मिले सके. इससे बसों, वैन आदि की बिक्री बढ़ सकती है. इसके अलावा इंडस्ट्री ने नए वाहनों पर रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को भी हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है.
एक साल से हालत खराब
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अनुसार, पिछले साल सभी तरह के वाहनों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है. पिछले साल यानी 2019 में कुल 2,30,73,438 वाहनों की बिक्री हुई जो 2018 के 2,67,58,787 वाहनों के मुकाबले 13.77 फीसदी ज्यादा है. यह साल 1997 के बाद यानी 22 साल की सबसे बड़ी गिरावट है. इसके पहले 2007 में वाहनों की बिक्री में 1.44 फीसदी की गिरावट देखी गई थी.