केन्द्र सरकार ने बिल्डरों से कहा कि वे GST प्रणाली के तहत करों में की गई कमी का लाभ अपने ग्राहकों तक कीमतें और किस्तों को कम करके पहुंचाएं नहीं तो मुनाफाखोरी की धारा के तहत उन पर कार्रवाई की जाएगी.
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 'वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के तहत कम कर का फायदा जमीन के कम कीमतों और किस्तों के जरिये खरीदारों तक पहुंचाने की उम्मीद की जा रही है. इसलिए सभी बिल्डरों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों को सलाह दी जाती है कि जीएसटी लागू होने के बाद निर्माण के तहत फ्लैट, वे ग्राहकों को किस्तों पर उच्च कर की दर देने के लिए नहीं कहेंगे.'
बयान में कहा गया, 'इस स्पष्टता के बावजूद, यदि किसी भी बिल्डर ने इस तरह की हरकत की तो उसे जीएसटी कानून की धारा 171 के तहत मुनाफाखोरी माना जा सकता है.'
सरकार का यह स्पष्टीकरण केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क (सीबीईसी) और राज्यों को मिली कई शिकायतों के बाद आया है, जिसमें बिल्डर जीएसटी के तहत 12 फीसदी सेवा कर को देखते हुए निमार्णाधीन फ्लैट्स और परिसरों में बुकिंग करनेवाले ग्राहकों से जिन्होंने किश्तों में भुगतान किया है. उन्हें 1 जुलाई से पहले पूरा भुगतान करने को कहा जा रहा है या फिर ज्यादा कर चुकाने की बात कही जा रही है.
सरकार ने कहा, "यह जीएसटी कानून के खिलाफ है. इसमें कहा गया कि वर्तमान में फ्लैट, कॉम्प्लेक्स और भवनों पर जितना केंद्रीय और राज्य सरकार द्वारा अप्रत्यक्ष कर लिया जाता है, जीएसटी लागू होने के बाद उससे कम कर लगेगा.
जीएसटी के अंतर्गत 12 फीसदी कर लगेगा, जिसमें इनपुट क्रेडिट की छूट मिलेगी.