scorecardresearch
 

शी जिनपिंग को विरोध नहीं पसंद इसलिए बदला जाएगा चीन का संविधान?

संसद से पारित होने के बाद शी जिनपिंग चीन के इतिहास में माओ त्से तुंग के बाद चीन के सबसे ताकतवर नेता के तौर पर दुनिया के सामने होंगे. हालांकि चीन सरकार का यह फैसला बीते तीन-चार दशकों की उस नीति को दरकिनार कर देगा जिसने किसी एक व्यक्ति के हाथ में सत्ता का केन्द्रीयकरण नहीं.....

Advertisement
X
इस तस्वीर में नहीं है शी जिनपिंग का विकल्प
इस तस्वीर में नहीं है शी जिनपिंग का विकल्प

Advertisement

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब 2023 में रिटायर नहीं होंगे. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने संविधान में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए महज पांच वर्ष के दो कार्यकाल की बाध्यता को खत्म करने की पहल कर दी है. संसद से पारित होने के बाद शी जिनपिंग चीन के इतिहास में माओ त्से तुंग के बाद चीन के सबसे ताकतवर नेता के तौर पर दुनिया के सामने होंगे. हालांकि चीन सरकार का यह फैसला बीते तीन-चार दशकों की उस नीति को दरकिनार कर देगा जिसने किसी एक व्यक्ति के हाथ में सत्ता का केन्द्रीयकरण नहीं होने दिया. लिहाजा, संविधान में प्रस्तावित इस संशोधन के बाद एक बार फिर माओ त्से तुंग की तर्ज पर चीन में सत्ता सिर्फ और सिर्फ शी जिनपिंग में केन्द्रित हो जाएगी.

क्यों चीन में बना था दो कार्यकाल का नियम?

Advertisement

माओ त्से तुंग के कार्यकाल में चीन सरकार की ज्यादतियों को देखते हुए 1982 में चीन के राष्ट्रपति डेंग जियोपिंग ने संविधान में संशोधन कर दोनों राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल को सीमित करने का फैसला लिया. यह कदम डेंग ने इसलिए उठाया जिससे देश में कोई एक व्यक्ति माओ त्से तुंग की तरह तानाशाह न बनने पाए.

फिर क्यों बदला जा रहा है ये कानून?

कम्युनिस्ट पार्टी अपने इस फैसले से चीन में तानाशाही के खतरे का कोई जिक्र नहीं कर है. हालांकि माना जा रहा है कि यह फैसला राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अबतक के कार्यकाल का असर है. इससे पहले शी जिनपिंग ने अपने कार्यकाल के दौरान देश के संविधान में अपनी राजनीति विचारधारा को छपवाया है. जिनपिंग से पहले महज माओ त्से तुंग के राजनीतिक विचार संविधान में छपा है.

इसे पढ़ें: चीन में जिनपिंग के मजबूत होने से यूं बढ़ जाएंगी PM मोदी की चुनौतियां?

लिहाजा, इस फैसले से कहा जा सकता है कि जिनपिंग चीन में अपने राजनीतिक कद को बढ़ाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं. इसके अलावा चीन के राजनीतिक खेमें में यह धारणा मजबूत है कि  बीते कार्यकाल के दौरान विश्व पटल पर चीन की साख मजबूत करने और बड़े आर्थिक सुधारों के साथ देश को आगे बढ़ाने का काम सिर्फ शी जिनपिंग की अगुआई में संभव है.

Advertisement

क्या शी जिनपिंग होंगे चीन के दूसरे माओ त्से तुंग?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के इतिहास में यह दूसरा मौका होगा जब कोई राष्ट्रपति सत्ता और शक्ति का एकमात्र केन्द्र बन जाए. माओ के चीन से समझ लेते हुए मौजूदा समय में शी जिनपिंग का कहा कोई भी शब्द देश का कानून है. शी जिनपिंग ने भी माओ की तर्ज पर पार्टी, सेना और मीडिया को निजी निष्ठा के आधार पर बांधने की कवायद की है जिसके चलते लगभग 30 दशक के अंतराल के बाद एक बार फिर चीन में सभी शक्तियां उनमें निहित हैं. शी जिनपिंग को खुद कहते सुना गया है कि उनकी आर्थिक नीतियां और घरेलू नीतियों का प्रभाव अगले 50 वर्षों में अपने शीर्ष होगा और इनके सहारे चीन दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बनने में कामयाब होगी. शी के इस बयान को मौजूदा चीन में मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

Advertisement
Advertisement