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राहत पैकेज के बाद मोदी कैबिनेट ने दी और राहत, बढ़ाया MSME का दायरा

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोरोना पर घोषित किए गए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सोमवार को मंजूरी दी. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की परिभाषा में फिर से बदलाव करते हुए इसे और व्यापक बनाया गया है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को कैबिनेट कमिटी की बैठक के बाद इसकी जानकारी दी.

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MSME की परिभाषा को और व्यापक बनाया गया
MSME की परिभाषा को और व्यापक बनाया गया

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  • केंद्रीय कैबिनेट ने राहत पैकेज के कई प्रस्तावों को मंजूरी दी
  • राहत पैकेज से आगे जाकर MSME का दायरा बढ़ाया गया
  • एमएसएमई के कर्ज के लिए कई प्रस्तावों को भी मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने कोरोना पर घोषित किए गए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सोमवार को मंजूरी दी. इनमें महत्वपूर्ण यह है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की परिभाषा में फिर से बदलाव करते हुए इसे और व्यापक बनाया गया है.

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को कैबिनेट कमिटी की बैठक के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, '6 करोड़ से अधिक एमएसएमई की देश की आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण भूमिका है. कैबिनेट ने आज आत्मनिर्भर भारत के पैकेज के कई महत्वपूर्ण ऐलान को मंजूरी दी है. एमएसएमई की परिभाषा में परिवर्तन को मंजूरी दी गई है. यही नहीं, इनकी परिभाषा और व्यापक कर दी गई है. ये संशोधन 14 साल बाद हुए हैं.'

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उन्होंने बताया कि इसके अलावा एमएसएमई को 20 हजार करोड़ रुपये के सबार्डिनेट कर्ज और 50 हजार करोड़ रुपये इक्विटी निवेश योजना को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.'

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने इतनी महत्वपूर्ण भूमिका को पहचान लिया. अर्थव्यवस्था को उबारने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया गया है.

संकटग्रस्त एमएसएमई को सहायता देने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये के अधीनस्थ कर्ज और 50,000 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश योजना को भी मंजूरी दी गई. ये उन्हें शेयर बाजार में निवेश में मदद करेगा.

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अब ये है एमएसएमई की परिभाषा

एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि 2006 में एक एक्ट लागू करके एमएसएमई की परिभाषा तय की गई थी. उन्होंने कहा कि ये सभी यूनिट जितना भी एक्सपोर्ट करेंगे उसको टर्नओवर में शामिल नहीं किया जाएगा. इससे रोजगार काफी बढ़ेगा और इनका जीडीपी ग्रोथ में योगदान बढ़ेगा. इसके अलावा 4,000 करोड़ का डिस्ट्रेस एसेट फंड और 50,000 करोड़ रुपये के फंड्स ऑफ फंड की स्थापना को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी.

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- पहले मैन्युफैक्चरिंग में 25 लाख और सर्विस सेक्टर में 10 लाख तक के निवेश वाले उद्यम को सूक्ष्म उद्यम माना जाता था. अब मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का अंतर तीनों श्रेणी में खत्म कर दिया गया है. वित्त मंत्री ने ऐलान किया था कि इसे बढ़ाकर निवेश 1 करोड़ और टर्नओवर 5 करोड़ रुपये तक कर देने का ऐलान किया था. इस परिभाषा को बरकरार रखा गया.

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- लघु यानी स्माल यूनिट की परिभाषा में निवेश 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ और टर्नओवर 2 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ किया गया. यानी इसमें टर्नओवर में 25 गुना बढ़त कर दी गई.

- मी​डियम यूनिट के लिए निवेश 2 करोड़ और टर्नओवर 5 करोड़ रखने की शर्त थी. वित्त मंत्री ने घोषणा की थी कि इसे बढ़ाकर क्रमश: 20 करोड़ और 100 करोड़ रुपये किया जाएगा. लेकिन कैबिनेट ने इसे और बढ़ाते हुए अब निवेश 50 करोड़ और टर्नओवर 250 करोड़ कर दिया.

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