कोरोना वायरस के संकट के बीच मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया. इसके बाद बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस आर्थिक पैकेज की विस्तार से जानकारी दी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) को राहत की घोषणा की.
भारतीय मजदूर संघ ने एमएसएमई को राहत देने के केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण के कदम का स्वागत किया है. इसके साथ ही यह भी कहा कि ईपीएफ दर को तीन महीने के लिए 12 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने के फैसले को टाला जाना चाहिए था. दरअसल, बुधवार आर्थिक पैकेज की जानकारी देते हुए सीतारमण ने ऐलान किया कि कर्मचारियों का 12 फीसदी की जगह 10 फीसदी ईपीएफ कटेगा. हालांकि पीएसयू में 12 फीसदी ही ईपीएफ कटेगा.
इस दौरान वित्त मंत्री ने घोषणा की कि 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में से 3 लाख करोड़ एमएसएमई को जाएंगे. इनको बिना गारंटी लोन मिलेगा. इसकी समय सीमा 4 साल की होगी. इनको 12 महीने की छूट मिलेगी. इसका लाभ 31 अक्टूबर 2020 तक के लिए ही होगा.
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक पैकेज की जानकारी देते हुए बताया कि एमएसएमई की परिभाषा बदल दी गई है. इसमें निवेश की सीमा में बदलाव किया गया है. अब एक करोड़ निवेश या 10 करोड़ टर्नओवर पर सूक्ष्म उद्योग का दर्जा दिया जाएगा, जबकि 10 करोड़ निवेश या 50 करोड़ टर्नओवर पर लघु उद्योग का दर्जा दिया जाएगा. इसके अलावा 20 करोड़ निवेश या 100 करोड़ टर्नओवर पर मध्यम उद्योग का दर्जा होगा.
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इस बीच उन्होंने एमएसएमई को ई-मार्केट से जोड़ने की भी बात कही. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में ट्रेड फेयर संभव नहीं है. 200 करोड़ तक का टेंडर ग्लोबल नहीं होगा. यह एमएसएमई के लिए बड़ा कदम है. वित्त मंत्री ने कहा कि संकट से गुजर रहे एमएसएमई को सबआर्डिनेट डेट के माध्यम से 20000 करोड़ की नकदी की व्यवस्था की जाएगी. इसके अलावा एमएसएमई जो सक्षम हैं, लेकिन कोरोना की वजह से परेशान हैं, उन्हें कारोबार विस्तार के लिए 10,000 करोड़ के फंड्स ऑफ फंड के माध्यम से मदद दी जाएगी.
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