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मदरसा काशिफ-उल-उलूम के नाम से है मरकज का बैंक खाता, खंगाल रही ED

निजामुद्दीन मरकज का खाता बैंक ऑफ इंडिया की पुरानी दिल्ली शाखा में है. जानकारी अनुसार मरकज का यह खाता 'मदरसा काशिफ- उल- उलूम' नाम से है. अब क्राइम ब्रांच और ईडी मरकज के इस बैंक खाते को खंगाल रही हैं.

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क्राइम ब्रांच भी कर रही पड़ताल (फाइल फोटो)
क्राइम ब्रांच भी कर रही पड़ताल (फाइल फोटो)

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  • बैंक ऑफ इंडिया की पुरानी दिल्ली शाखा में है खाता
  • दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच भी कर रही पड़ताल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज की तबलीगी जमात का मुखिया मौलाना साद अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच मौलाना की तलाश में है, लेकिन वह हाथ नहीं आ रहा. पुलिस को चकमा देकर मौलाना लगातार ऑडियो पर ऑडियो जारी कर रहा है, मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दे रहा है. इन सबके बीच जांच एजेंसियों ने मरकज के बैंक खाते का पता लगा लिया है.

निजामुद्दीन मरकज का खाता बैंक ऑफ इंडिया की पुरानी दिल्ली शाखा में है. जानकारी अनुसार मरकज का यह खाता 'मदरसा काशिफ- उल- उलूम' नाम से है. अब क्राइम ब्रांच और ईडी मरकज के इस बैंक खाते को खंगाल रही हैं. बताया जाता है कि 20 जून साल 2016 को मरकज के अंदर कुछ लोगों को बांधकर बुरी तरह से पीटने और धमकी देने की शिकायत भी दर्ज हुई थी.

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निजामुद्दीन थाने में मरकज की जमात में आए कुछ लोगों ने मरकज के प्रबंधन से जुड़े लोगों पर मरकज के अंदर बंद करके मारपीट करने का धमकी देने का आरोप लगाया था और एफआईआर दर्ज कराई थी. सूत्र बताते हैं कि मौलाना साद ने अपने रसूख के दम पर तब पीड़ितों के खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज करवा दी थी. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी. हालांकि, बाद में मामला कोर्ट में सेटल हो गया था.

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बैंक खाते की जानकारी हाथ लगने से यह साफ हो गया है कि मरकज अब भी मदरसे के नाम से चलती है. मरकज में सत्ता को लेकर भी साद और उसके विरोधियों के बीच कई बार संघर्ष हो चुका है. इसकी वजह मरकज में आने वाला पैसा बताया जाता है. मरकज की 5 मंजिला बिल्डिंग को आलीशान तरीके से बनवाया गया है और इसी में मौलाना का परिवार और बेटे रहते हैं.

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बता दें कि लॉकडाउन के बीच जब धारा 144 लागू थी, निजामुद्दीन के मरकज से 2000 से अधिक जमातियों को निकाला गया था. जमातियों के कारण कई राज्यों तक कोरोना पहुंचा. इस मामले में साद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी.

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