8 नवंबर 2016 को लागू नोटबंदी के बाद प्रतिबंधित की गई 500 और 1000 रुपये की करेंसी को पहले बैंक समेत कई संस्थानों में जमा किया गया. पुरानी करेंसी को बैंक में जमा करने की आखिरी तारीख बीतने के दो महाने बाद अब देश के दूसरे सबसे बड़े मंदिर तिरुपती बालाजी के दानपात्र से 4 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित करेंसी मिली है. क्या सरकार अब इस करेंसी के पाए जाने को गैरकानूनी घोषित कर आरोपी पर 8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाएगी?
10 से ज्यादा करेंसी मिलने पर जुर्माना या जेल
केन्द्र सरकार ने किसी व्यक्ति के पास पुरानी करेंसी पाए जाने पर जुर्माना लगाने का कानून तैयार कर पास करा लिया है. 27, फरवरी 2017 को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कानून पर अपनी मुहर लगा दी है और सरकार ने गैजेट में इसे नोटिफाई कर दिया है.
इस कानून के चलते जिन लोगों ने करेंसी को बदलने का काम समय से नहीं किया या टैक्स नेट से बचने के लिए अपने पास मौजूद पुरानी करेंसी को जमा नहीं किया और पकड़े गए तो उनपर सरकार कम से कम 10,000 रुपये का जुर्माना लगाएगी. इसी कानून के मुताबिक यदि किसी ने पुरानी करेंसी के बारे में गलत सूचना मुहैया कराई है तो उसपर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा.
कानून के मुताबिक कोई आम आदमी अपने पास सिर्फ 10 की मात्रा में पुरानी करेंसी रख सकता है. वहीं किसी रिसर्च के लिए संस्था के पास अधिकतम 25 पुरानी करेंसी हो सकती है. किसी के पास इससे अधिक करेंसी पाए जाने पर सरकार उससे 10,000 रुपये या पाई गई करेंसी का पांच गुना रकम जुर्माने में वसूलेगी.
नए कानून के मुताबिक देश में 31 दिसंबर 2016 के बाद पुरानी करेंसी का लेनदेन अथवा किसी के पास पाया जाना वर्जित है. इस कानून के उल्लंघन में कोर्ट जुर्माने के साथ-साथ जेल का भी प्रावधान कर सकती है.
तिरुपती बालाजी मंदिर प्रशाषन ने केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक से अपने पास जमा हुई प्रति करेंसी के बारे में पूछा है. मंदिर प्रशाषन जानना चाहता है कि क्या इस तरह पाई गई प्रतिबंधिक करेंसी को वह अपने बैंक खाते में जमा करा सकता है. या फिर यह करेंसी अब किसी काम नहीं आएगी और उसे जमा कराना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.
मंदिर प्रशासन के सामने बड़ा सवाल यह भी है कि वह आने वाले दिनों में अपने दानपात्र की सुरक्षा कैसे करे कि कोई श्रद्धालू आगे से बेकार हो चुकी करेंसी उसके दान पात्र में न डालने पाए. गौरतलब है कि देश के बड़े मंदिरों में प्रथा के मुताबिक गुप्त दान का प्रावधान भी रहता है जिसमें मंदिर प्रशासन श्रद्धालू द्वारा किए जा रहे दान की दान से पहले कोई गणना नहीं करता.
हालांकि सवाल अब पैदा होता है कि क्या केन्द्र सरकार के नियमों के चलते अब इस करेंसी के एक मुस्त पाए जाने पर कोई दोषी ठहराया जा सकता है?