कोरोना संकट से उबारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था. इस पैकेज के बारे में विस्तार से बताने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार 5 दिनों तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. हालांकि, सरकार के इस पैकेज से ऑटो इंडस्ट्री और रिटेल कारोबारियों में नाराजगी है.
आर्थिक पैकेज पर पुनर्विचार की मांग
रिटेल कारोबारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने तो आर्थिक पैकेज पर पुनर्विचार की भी मांग कर दी है. कैट ने कहा कि व्यापारियों ने संकट के समय सबसे अधिक प्रतिबद्धता दिखायी है और वे कोरोना वायरस महामारी के कारण कायम संकट की स्थिति में देश के प्रति अपने दायित्वों को निभाते रहेंगे. लेकिन आर्थिक पैकेज की व्यापक घोषणाओं में जगह नहीं मिलना निराशाजनक है.
कैट ने बताया कि उसने इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजकर आर्थिक पैकेज पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है. संगठन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी को भी पत्र भेजा है.
ऑटो सेक्टर को कुछ नहीं मिला
वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम ने कहा, ‘आत्मनिर्भर भारत’ पैकेज में ऑटो सेक्टर को कुछ नहीं दिया गया. जबकि नौकरी बचाने और मांग बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र को तत्काल राहत देने की जरूरत है. सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (सियाम) ने कहा कि उसने विभिन्न स्तर पर सरकार के साथ चर्चा की थी. उसे 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज में सरकार से सीधी राजकोषीय मदद (कर छूट) की उम्मीद थी.
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सियाम के अध्यक्ष राजन वढेरा ने कहा, ‘‘ कृषि क्षेत्र को दी गयी राहत से मध्यम अवधि में वाहन क्षेत्र को अप्रत्यक्ष तौर पर लाभ होगा, लेकिन भारतीय वाहन क्षेत्र में मांग को गति देने के लिए तत्काल प्रोत्साहन देने की जरूरत थी जो नहीं दी गयी.’’ उन्होंने कहा कि वाहन क्षेत्र देश में 3.7 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है.वहीं सरकार के जीएसटी कलेक्शन में करीब 15 प्रतिशत यानी 1.50 लाख करोड़ रुपये का योगदान करता है. पिछले साल वाहन क्षेत्र को वृद्धि में 18 प्रतिशत की गिरावट देखना पड़ी थी.