कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से भारतीय शेयर बाजार अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. शेयर बाजार के इतिहास में पहली बार है जब सिर्फ 15 दिन के भीतर दो बार गिरावट की वजह से लोअर सर्किट लगाने की नौबत आ गई. ऐसा नहीं है कि बाजार सिर्फ कोरोना वायरस का प्रकोप झेल रहा है. वित्त वर्ष 2019-20 में कई ऐसे मौके आए हैं जिस वजह से शेयर बाजार की हालत पतली हुई है.
वित्त वर्ष 2019-20 में सेंसेक्स की चाल
चालू वित्त वर्ष के पहले दिन यानी 1 अप्रैल 2019 को जब भारतीय शेयर बाजार में कारोबार हुआ तो इस दिन सेंसेक्स 39000 अंक के स्तर के करीब था, जो 23 मई 2019 को 40 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया. निफ्टी ने भी 12 हजार अंक के स्तर को पार किया. ये वो दिन था जब लोकसभा चुनाव के नतीजे जारी हुए थे. नतीजों में नरेंद्र मोदी सरकार की सत्ता में वापसी की वजह से शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिली थी.
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इसके बाद 5 जुलाई को केंद्र की मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का पहला आम बजट पेश किया. इस बजट में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआईज) के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स बढ़ा दिया गया. इसका असर ये हुआ कि जुलाई में शेयर बाजार में 17 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. आंकड़े बताते हैं कि जुलाई 2019 में निफ्टी 5.68 फीसदी लुढ़का जबकि सेंसेक्स में 4.86 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. शेयर बाजार की ऐसी बुरी हालत साल 2002 में देखने को मिली थी. शेयर बाजार में सुस्ती की अन्य प्रमुख वजहों में अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर, कंपनियों के खराब नतीजे, आर्थिक आंकड़ों में गिरावट और मॉनसून में देरी रही.
..और फिर बाजार में लौटी रौनक
बाजार में सुस्ती का ये सिलसिला सितंबर के शुरुआती हफ्ते तक चला. इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सुस्ती दूर करने के लिए कॉरपोरेट टैक्स में छूट का ऐलान किया. इस ऐलान की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी ने लंबी छलांग लगाई. नवंबर में सेंसेक्स ने 41 हजार अंक के स्तर को पार किया तो निफ्टी भी 13 हजार के करीब आ गया.
नए साल यानी 2020 के पहले महीने में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर खत्म हो गया. इस वजह से सेंसेक्स 42 हजार अंक के स्तर को पार किया. यह पहली बार था जब सेंसेक्स 42 हजार अंक को पार किया. सेंसेक्स का अब नया उच्चतम स्तर 42273.87 अंक है. सेंसेक्स ने ये रिकॉर्ड हाई 20 जनवरी 2020 को टच किया.
कोरोना का प्रहार..
बाजार की ये तेजी ज्यादा दिन तक नहीं चल सकी और इस पर कोरोना वायरस का प्रभाव पड़ने लगा. कुछ ही दिनों में चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस का प्रसार दुनिया के कई बड़े देशों में हो गया. वहीं, फरवरी 2020 में एक बार फिर सरकार ने आम बजट पेश किया. इस बजट से निवेशकों को रियायत की उम्मीद थी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला और बाजार में एक बार फिर बड़ी गिरावट दिखी.
बीते एक महीने में सेंसेक्स करीब 13 हजार अंकों यानी 30 फीसदी तक लुढ़क चुका है. वहीं, निफ्टी में इस दौरान 4000 अंकों की बड़ी गिरावट रही है. इस दौरान बीएसई इंडेक्स में 50 लाख करोड़ से ज्यादा मार्केट कैप कम हुआ है. हालात इतने बुरे हो चुके हैं कि बीते 15 कारोबारी दिन के भीतर भारतीय शेयर बाजार में दो बार लोअर सर्किट लगाना पड़ा है.