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देश में लकड़ी का आयात सस्ता और सरल होना चाहिए, फर्नीचर उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा: गोयल  

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि फर्नीचर को भारत में ही बनाया जाना चाहिए क्योंकि यहां अच्छा फर्नीचर बनाने वाले कुशल कामगार मौजूद हैं. दुनियाभर में फर्नीचर का 20 से 22 लाख करोड़ रुपये का कारोबार है लेकिन इस कारोबार में हमारी मौजूदगी नहीं है.

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सस्ते लकड़ी के आयात की पीयूष गोयल ने की वकालत
सस्ते लकड़ी के आयात की पीयूष गोयल ने की वकालत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पीयूष गोयल ने की सस्ते लकड़ी आयात की वकालत
  • उन्होंने कहा कि वह पर्यावरण मंत्रालय से बात करेंगे
  • उन्होंने कहा कि इससे फर्नीचर इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि लकड़ी का सस्ते दाम पर सरल प्रक्रिया के साथ आयात होने से देश में फर्नीचर के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है और इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेगे. 
उन्होंने कहा कि फर्नीचर को भारत में ही बनाया जाना चाहिए क्योंकि यहां अच्छा फर्नीचर बनाने वाले कुशल कामगार मौजूद हैं. गोयल ने कहा कि दुनियाभर में फर्नीचर का 20 से 22 लाख करोड़ रुपये का कारोबार है लेकिन इस कारोबार में हमारी मौजूदगी नहीं है, बल्कि उल्टे हम फर्नीचर का आयात करते हैं. 

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संबंधित मंत्रालय से बात 
पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि वह संबंधित मंत्रालय से बात कर रहे हैं कि क्या भारत में बिना किसी शुल्क के लकड़ी का आयात किया जा सकता है और क्या हम आयात की इस प्रक्रिया को काफी सरल रख सकते हैं, क्योंकि इस मामले में कुछ पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी आते हैं.'

क्या कहा पीयूष गोयल ने 
 न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक गोयल यहां आल इंडिया वैश्य फेडरेशन द्वारा आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे. यह वेबिनार ‘आत्मनिर्भर भारत: अवसर, चुनौतियां और आगे का मार्ग’ पर आयोजित की गई थी. उन्होंने कहा, ‘कोई शुल्क नहीं लगना चाहिए. लकड़ी भारत में पर्याप्त मात्रा में नहीं है. हम लकड़ी के आयात को सस्ता और सरल बना सकते हैं.'
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बनेगा फर्नीचर का क्लस्टर 
 उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) बंदरगाह के समीप एक फर्नीचार क्लस्टर बनाने पर काम कर रहा है जहां हमारे पास विभन्न प्रकार के परीक्षण, शोध, डिजाइन और पैकिंग की आधुनिक साझा सुविधायें उपलब्ध होंगी.
 गोयल ने कहा कि इस प्रकार के क्लस्टर में बड़े पैमाने पर फर्नीचार का उत्पादन हो सकेगा जो कि घरेलू मांग को पूरा करने के साथ ही वैश्विक आवश्यकताओं को भी पूरा करेंगे. इससे लाखों लोगों के लिये रोजगार का भी सृजन होगा. 

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