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इनकम टैक्‍स में 80सी के तहत मिलती है ये छूट

अगर आपने अब तक टैक्‍स प्‍लानिंग नहीं की है तो जल्‍दी कर लें. क्‍योंकि जल्‍दी ही साल 2016-17 वित्‍तीय वर्ष खत्‍म होने वाला है. जानिये 80C के तहत कैसे बचा सकते हैं टैक्‍स...

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इनकम टैक्‍स
इनकम टैक्‍स

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अगर आप अब तक टैक्‍स बचाने की योजना नहीं बना पाए हैं तो अब जल्‍दी करें. इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइन करने का मौसम शुरू है. किसी वजह से आपने अब तक टैक्‍स की योजना नहीं बनाई है तो अब आपके पास मौजूदा वित्‍त वर्ष में बस कुछ ही दिन रह गए हैं. आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत आप कई योजनाओं और मार्केट में निवेश कर अपना टैक्‍स बचा सकते हैं. क्‍या-क्‍या आता है 80सी के दायरे में और कितना बचा सकते हैं टैक्‍स, जानिये सबकुछ यहां -

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1. मार्केट में निवेश कर बचा सकते हैं टैक्‍स

इनकम टैक्‍स 80सी के तहत तीन तरह से इनकम टैक्‍स बचा सकते हैं. इनमें से एक है मार्केट लिंक्‍स योजनाओं में निवेश है. जैसे कि

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ईएलएसएस(ELSS) : टैक्स में छूट पाने का यह एक बेहद आसान तरीका है. दरअसल, यह एक प्रकार का डाइवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड है, जिसे इनकम टैक्स कानून के तहत टैक्स में छूट के लिए खरीदा जाता है. इसकी अहम बात यह है कि आप टैक्स बचाने के साथ-साथ इसमें निवेश किए गए पैसे में वृद्धि के भी हकदार है. यह स्कीम तीन साल के लॉक इन पीरियड के साथ उपलब्ध है. मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव का इस पर कम ही असर देखने को मिलता है. यानी इसमें निवेश कर आप दोहरे फायदे में आ सकते हैं. पहला टैक्‍स बचाएंगे और

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यूलिप (ULIP): यूलिप दरअसल 2 in 1 प्‍लान है. यानी एक में दो का प्‍लान. इसमें निवेश की गई रकम को ईक्‍व‍िटी और इंश्योरेंस प्लान दोनों के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है. यानी निवेश राशि के एक हिस्‍से को बीमा के लिए तो दूसरे को ईक्‍व‍िटी के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा. यह सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स में छूट का भी हकदार है.

2. फिक्‍स इनकम पर बचता है टैक्‍स

इनकम टैक्‍स 80सी के तहत फिक्‍स इनकम के जरिये भी टैक्‍स बचत की जा सकती है. जानिये इसके तहत कहां कर सकते हैं निवेश...

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पीपीएफ(PPF): लंबे समय के लिए इनवेस्ट करने वालों के लिए पीपीएफ बेस्ट है. यह 15 साल की योजना है, जिसमें एक साल में अधिकतम 70 हजार रुपये की रकम जमा कराई जा सकती है. इससे मिले ब्याज पर टैक्स नहीं लगता. यह 15 साल के लिए होता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर छह साल बाद पैसा निकाला जा सकता है.

सुकन्या समृद्धि स्कीम(SSS): इस स्कीम के तहत यदि आप अपनी 10 साल से कम उम्र की बेटी के नाम पर निवेश करते हैं तो आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत 1.50 लाख रुपये तक के निवेश पर आप छूट ले सकते हैं. इस स्कीम के तहत आप दो बेटियों के लिए खाता खुलवा सकते हैं और 21 साल बाद यह खाता बंद हो जाएगा. मौजूदा समय में इसमें निवेश पर आपको 8.5 फीसदी का ब्याज मिलता है.

टैक्‍स बचाने वाले FD: फिक्स्ड डिपॉजिट आम बैंक एफडी से कम ब्याज पर मिलता है. ऐसे डिपॉजिट में 5 साल का लॉक इन पीरियड रहता है. हालांकि इस एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाया जाता है.

ईपीएफ : आपकी सैलरी से प्रति माह प्रॉविडेंट फंड के लिए कटने वाला पैसा भी इनकम टैक्स नियम के सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स में छूट का हकदार है.

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नेशनल पेमेंट सिस्टम (NPS): आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत एनपीएस में आप 1.50 लाख रुपये तक का निवेश प्रति वर्ष कर सकते हैं. वहीं सेक्शन 80 सीसीडी(1बी) के तहत आप 50,000 रुपये का अतिरिक्त निवेश कर सकते हैं. लिहाजा एनपीएस में आप कुल 2 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स में छूट के हकदार है.

एनएससी (NSC): यदि आप टैक्स बचत के साथ सुरक्षित निवेश एवं गारिंटिड रिटर्न चाहते हैं तो नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) में निवेश आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. आयकर अधिनियम की धारा 80सी के अंतर्गत एनएससी में निवेश पर आय से 100000 रुपये तक की छूट प्राप्त की जा सकती है. एनएससी पर अर्जित ब्याज प्रत्येक वर्ष की आय में शामिल किया जाता है. चूकि पहले 5 साल का ब्याज मैच्योरिटी पर दिया जाता है इसलिए उसे संबंधित वर्ष में रिइन्वेस्टमेंट मानकर उसकी भी छूट धारा 80 सी के तहत मिल जाती है.

इंफ्रा बॉन्‍ड्स : इंफ्रा बॉन्‍ड्स के जरिये दरअसल, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में निवेश किया जाता है. इनकम टैक्स नियम के सेक्शन 80 सी के तहत इसमें निवेश कर आप कुछ टैक्‍स बचा सकते हैं.

सीनियर सिटिजन सेविंग स्‍कीम : सीनियर सिटिजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) 60 साल या ज्यादा उम्र के इंडियन सिटिजन्स के लिए होती है. यह पांच साल की डिपॉजिट स्कीम है, जिसमें हर तीन महीने पर ब्याज मिलता है. इसमें अकेले या जाइंट होल्डर के साथ मिलकर ज्यादा से ज्यादा 15 लाख रुपये तक इन्वेस्ट किया जा सकता है. मैच्‍योरिटी पर SCSS अकाउंट को तीन साल के लिए एक्सटेंड किया जा सकता है.

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नाबार्ड बॉन्‍ड (NABARD Bonds): नाबार्ड लंबी अवधि के लिए जीरो कूपन बॉण्ड जारी करता है. यह 10 साल के लिए होता है.

3. दूसरे तरह के निवेश

लाइफ इंश्‍योरेंस प्रीमियम : जीवन बीमा पॉलिसी साल भर में आप जो भी प्रीमियम चुकाते हैं, उसे अपनी कुल टैक्सेबल इनकम में से घटा सकते हैं. अगर अब तक ऐसी पॉलिसी नहीं ली है तो जरूर ले लें. हां, टैक्स में छूट के लिए प्रीमियम की रकम कुल बीमा राशि (सम एंश्योर्ड) के 20 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

होम लोन का रीपेमेंट (सिर्फ प्रिंसिपल) : हाउसिंग लोन के रीपेमेंट में प्रिंसिपल अमाउंट के तौर पर साल भर में अदा की जा रही रकम को भी आप अपनी टैक्सेबल इनकम से घटा सकते हैं.

बच्‍चों की ट्यूशन फीस : अपने किन्हीं दो बच्चों की पढ़ाई के खर्च पर आप छूट ले सकते हैं, बच्चों की उम्र कुछ भी हो. अधिकतम सीमा एक लाख रुपये है. हां, उनकी एजुकेशन फुलटाइम होनी चाहिए. प्राइवेट ट्यूशन या कोचिंग आदि में दी गई फीस इसमें नहीं चलेगी. साथ ही किताबों पर होने वाले खर्च, दाखिले के वक्त दिया गया डोनेशन, कैपिटेशन फीस, एडमिशन फीस, एनुअल चाजेर्ज (वार्षिक शुल्क), डिवेलपमेंट चार्ज आदि भी इसमें शामिल नहीं कर सकते.

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