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बिजली की कमी, पर मुफ्त देने का किया जा रहा वादा: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ऊर्जा क्रांति लाने पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने में विश्व का नेतृत्व करने के लिए भारत के पास पर्याप्त शक्ति और संसाधन हैं. उन्होंने गैरपरंपरागत ऊर्जा पर जोर दिया और बोले कि अब भी लाखों लोग अंधेरे में रह रहे हैं, लेकिन कुछ लोग मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहे हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ऊर्जा क्रांति लाने पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए भारत के पास पर्याप्त शक्ति और संसाधन हैं. उन्होंने गैरपरंपरागत ऊर्जा पर जोर दिया और कहा कि अब भी लाखों लोग अंधेरे में रह रहे हैं, लेकिन कुछ लोग मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने सोलर ऊर्जा और विंड एनर्जी की जरूरत बताई और कहा कि किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना होगा.

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मोदी ने दिल्ली में तीन दिवसीय नवीकरणीय ऊर्जा वैश्विक निवेशक सम्मेलन व एक्सपो (री-इन्वेस्ट) का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘यदि कोई एक ऐसा देश है, जो दुनिया को यह दिखा सके कि ग्लोबल वार्मिंग का मुकाबला किस तरह से किया जाए तो वह भारत है.’ उन्होंने कहा, ‘विपदा में मानवता का मार्ग सिर्फ भारत ही दिखा सकता है. क्योंकि हम प्रकृति से प्यार करते हैं. हम अपनी नदियों को मां की तरह पूजा करते हैं.’

भारतीय चेतना में सौर ऊर्जा के महत्व को बताते हुए मोदी ने नवीकरणीय स्रोतों की गुंजाइश बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ‘हमारी पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान सूर्य को सात घोड़ों पर सवारी करने वाला बताया गया है. आज के युग में सूर्य के इन सात घोड़ों में से चार घोड़े तापीय (कोयला), गैस, जल और परमाणु ऊर्जा हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हमें सौर, पवन और जैव ईंधन, इन तीन अन्य घोड़ों के भी ज्यादा उपयोग की जरूरत है.’

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प्रधानमंत्री के मुताबिक अच्छे सौर विकिरण वाले 50 से ज्यादा देशों की पहचान की गई है, जो सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं और इसे आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए विभिन्न तरह के तरीकों का पता लगा रहे हैं.

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने 2014-2024 के दशक को अक्षय ऊर्जा दशक के रूप में मनाए जाने का ऐलान किया है. सभी को ऊर्जा सुलभ कराने के संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्य का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल एनर्जी फॉर ऑल (एसई4ऑल) पहल ने पिछले महीने गुजरात सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया था.

मौजूदा समय में, पूरी दुनिया की 15 फीसदी आबादी यानी लगभग एक अरब लोगों को बिजली उपलब्ध नहीं होती है और 2.6 अरब लोगों के पास आधुनिक रसोई गैस की सुविधा नहीं है. ये लोग प्रदूषित ईंधनों पर निर्भर हैं. इनमें से 25.0 करोड़ लोग भारत में हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के दौरान भारत-अमेरिका के बीच हुए परमाणु समझौते पर बनी सहमति से विदेशी कंपनियों के लिए भारत में परमाणु ऊर्जा के विकास की राह आसान हुई है. सरकार ने 2020 में 100,000 मेगावाट सौर बिजली के उत्पादन को संशोधित कर 2022 में 20,000 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है.

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- इनपुट IANS से

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