आने वाले दिनों में यह संभव है कि क्यूआर (क्विक रिस्पांस) कोड के जरिए ट्रांजैक्शन करने पर आपको ऑफर्स की भरमार मिले. दरअसल, रिजर्व बैंक की एक समिति ने सरकार से क्यूआर कोड के जरिए ट्रांजैक्शन करने वाले ग्राहकों को प्रोत्साहन देने को कहा है. समिति ने कहा कि अर्थव्यवस्था में नकदी के इस्तेमाल को कम करने के लिए यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है.
क्या है सिफारिश में?
आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर एमरिटस डी बी पाठक की अध्यक्षता वाली रिजर्व बैंक की इस समिति ने क्यूआर कोड पर सुझाव दिए हैं. इसके साथ ही समिति ने कहा है कि जो व्यापारी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भुगतान स्वीकार करते हैं उन्हें टैक्स प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिये.
क्यूआर कोड के विश्लेषण के लिए गठित इस समिति ने कहा कि देश में क्यूआर कोड के जरिये लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए और इसे लोगों के बीच आकर्षक बनाने के लिये सरकार को प्रोत्साहन योजनाओं को भी शुरू करना चाहिए.
10 अगस्त तक मांगे सुझाव
रिजर्व बैंक को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कागज आधारित क्यूआर कोड काफी सस्ता और लागत प्रभावी है. इसमें रखरखाव की भी जरूरत नहीं पड़ती है. रिजर्व बैंक ने इस रिपोर्ट पर लोगों और अन्य संबंधित पक्षों से 10 अगस्त तक अपने सुझाव और टिप्पणियां भेजने को कहा है.
क्या है क्यूआर कोड?
यह एक तरह का बारकोड होता है जिसे मशीन के जरिये पढ़ लिया जाता है.क्यूआर कोड के जरिये विभिन्न बिक्री केन्द्रों और दुकानों पर मोबाइल से आसानी से भुगतान किया जा सकता है. क्यूआर कोर्ड के जरिये कोई भी बिजली, पानी, पेट्रोल, डीजल, किराना सामान, यात्रा और अन्य कई तरह के भुगतान कर सकता है.
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वहीं, क्यूआर कोड पर्याप्त सूचनाओं को अपने में संग्रहित रख सकता है. भारत में क्यूआर कोड भुगतान प्रणाली व्यापक तौर पर तीन तरह से- भारत क्यूआर, यूपीआई क्यूआर और प्राप्रिएटरी क्यूआर-- के जरिये काम करती है.