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सुधार के बाद फिर लुढ़का रुपया, ईरान पर USA का बैन बना कारण

पिछले हफ्ते रुपये में सुधार की स्थिति नए हफ्ते की शुरुआत में एक बार फिर से इसमें गिरावट दर्ज हुई. ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध के कारण क्रूड ऑयल के बढ़ते दामों को इसकी वजह मानी जा रही है.

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फाइल फोटो
फाइल फोटो

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पिछले हफ्ते सुधार के साथ अपनी स्थिति थोड़ी ठीक करने के बाद अब नए हफ्ते में भारतीय रुपया फिर से डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गया. 43 पैसे की गिरावट के साथ सोमवार को रुपये की कीमत घटकर 72.63 तक पहुंच गई.

भारतीय रुपये की गिरावट के पीछे अहम वजह अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने लगी हैं, इस कारण लोगों ने अचानक बिकवाली शुरू कर दी. ब्रेंट क्रूड सोमवार को 80 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. नवंबर 2014 के बाद यह सबसे ज्यादा महंगा हुआ है.

रिकवरी की स्थिति के बीच रुपया सोमवार को पिछले हफ्ते के मुकाबले 72.47 की गिरावट के साथ खुला. पिछले हफ्ते इंटर-बैंक फॉरेन एक्सचेंज (फोरेक्स) बाजार में रुपये की कीमत प्रति डॉलर 72.20 रुपये थी. पिछले हफ्ते ऐतिहासिक 72.99 अंकों तक गिरावट के बाद रुपये ने पिछले 2 सत्रों में सुधार किया और 78 पैसे का सुधार कर लिया था.

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पिछले कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन रुपये ने मजबूत शुरुआत की. शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 52 पैसे मजबूत हुआ और इस मजबूती के साथ यह 71.85 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. इससे पहले बुधवार को रुपया 72.37 के स्तर पर बंद हुआ था. गुरुवार को बाजार बंद रहा था.

ईरान पर प्रतिबंध का असर

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम बढ़ने से सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 43 पैसे की भारी गिरावट के साथ 72.63 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ. इससे पहले 2 कारोबारी दिनों में रुपये में मजबूती आई थी.

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज (फोरेक्स) बाजार में सोमवार कारोबार की शुरुआत में रुपये में सुधार का रुख पलटता दिखा और यह 72.47 रुपये पर कमजोर खुला जो पिछले हफ्ते 72.20 रुपये पर बंद हुआ था. आज दोपहर के कारोबार तक यह 72.73 रुपये तक लुढ़क गया और अंत में पिछले बंद भाव के मुकाबले 43 पैसे यानी 0.60 फीसदी की गिरावट के साथ 72.63 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ.

अमेरिका के साथ व्यापार शुल्क मुद्दे पर चीन के बातचीत से पीछे हटने के समाचारों से बाजार धारणा प्रभावित हुई. इससे एक बार फिर व्यापार युद्ध और भड़कने की आशंका बढ़ गई. बाजार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि कच्चे तेल मूल्य के बढ़ते दाम के मद्देनजर मुख्यत: तेल आयातक कंपनियों की महीने के अंत तक डॉलर मांग और पूंजी निकासी से घरेलू मुद्रा प्रभावित हुई.

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विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि

इस बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में वृद्धि के कारण 14 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.207 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर 400.489 अरब डॉलर हो गया. पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 81.95 करोड़ डॉलर घटकर 399.282 अरब डॉलर रह गया था.

विदेशी निधियों और विदेशी निवेशकों ने सितंबर में अभी तक पूंजी बाजार से 15,365 करोड़ रुपये (2.1 अरब डॉलर) की भारी पूंजी निकासी की है. इस बीच फाइनेंशल बेंचमार्क्स इंडिया प्रा लि (एफबीआईएल) ने सोमवार के कारोबार की संदर्भ दर अमेरिकी मुद्रा के लिए 72.6927 रुपये प्रति डॉलर और यूरो के लिये 85.2535 रुपये प्रति यूरो निर्धारित की थी. फोरेक्स कारोबार में पौंड, यूरो और जापानी येन के मुकाबले रुपये में गिरावट दर्ज हुई.

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