लंबे समय से कर्ज से जूझ रहे रिलायंस ग्रुप के मुखिया अनिल अंबानी की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं. बीते दिनों ब्रिटेन की अदालत ने अनिल अंबानी को चीन के बैंकों को करीब 5500 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था. अब भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई ने 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में आवेदन किया है.
एक सप्ताह का समय मिला
आवेदन में दावा किया गया है कि अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इंफ्राटेल को दिए गए कर्ज के लिए निजी गारंटी दी थी. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बीएस वी प्रकाश कुमार की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने आवेदन पर सुनवाई करते हुए अंबानी को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. वहीं, अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस इंफ्राटेल (आरआईटीएल) द्वारा लिए गए कॉरपोरेट कर्ज से संबंधित है और यह अंबानी का व्यक्तिगत कर्ज नहीं है.’’
इस बयान में आगे कहा गया कि अनिल अंबानी उपयुक्त जवाब दाखिल करेंगे और एनसीएलटी ने याचिकाकर्ता (एसबीआई) को कोई राहत नहीं दी है. आपको बता दें कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की प्रमुख कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 2019 की शुरुआत में दिवालियापन के लिए आवेदन किया था.
चीन के बैंकों ने भी लगाए थे आरोप
बीते मई महीने में ब्रिटेन की एक अदालत ने रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी से 21 दिन के भीतर 71.7 करोड़ डॉलर यानी 5,446 करोड़ का भुगतान करने को कहा था. यह मामला चीन के तीन बैंक- इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (आईसीबीसी) की मुंबई शाखा, चाइना डेवलपमेंट बैंक और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ चाइना से जुड़ा है.
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इन बैंकों ने लंदन की अदालत में दावा किया था कि अनिल अंबानी की निजी गारंटी की शर्त पर रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को 2012 में 92.52 करोड़ डॉलर (करीब 65 हजार करोड़ रुपये) का कर्ज दिया गया था. तब अनिल अंबानी ने इस लोन की पर्सनल गारंटी लेने की बात कही थी लेकिन फरवरी 2017 के बाद कंपनी लोन चुकाने में डिफॉल्ट हो गई.