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43 हजार तक पहुंच सकता है सेंसेक्स, बजट और मौद्रिक नीति पर रखें नजर

शेयर बाजारों ने एनडीए सरकार के सत्ता में लौटने पर काफी उत्साह दिखाया है और यही वजह है कि सेंसेक्स और निफ्टी में पिछले कई दिनों से तेजी का रुख बना हुआ है. अगले महीनों में भी इनमें मजबूती बने रहने की उम्मीद है.

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मोदी सरकार के आने से बाजार में उत्साह
मोदी सरकार के आने से बाजार में उत्साह

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रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और केन्द्र सरकार के बजट आने वाले दिनों में शेयर बाजार के लिहाज से काफी अहम होंगे. जानकारों का मानना है कि सेंसेक्स अगले साल मार्च तक 43 हजार तक पहुंच सकता है. शेयर बाजारों ने फिलहाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के सत्ता में लौटने पर काफी उत्साह दिखाया है और यही वजह है कि सेंसेक्स और निफ्टी में पिछले कई दिनों से तेजी का रुख बना हुआ है.

निजी क्षेत्र के कोटक सिक्युरिटीज का मानना है कि मार्च 2020 तक सेंसेक्स 42,000 से 43,300 अंक के दायरे में पहुंच जाएगा. ब्रोकरेज कंपनी के मुताबिक चुनाव परिणामों का उत्साह समाप्त होने के बाद बाजार बुनियादी कारकों को देखने लगेगा. अमेरिका- चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर और भारतीय अर्थव्यवस्था के आड़े आने वाले मुद्दों के समाधान पर बाजार की नजर होगी.

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न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कोटक सिक्युरिटीज के प्रबंध निदेशक और सीईओ कमलेश राव ने पत्रकारों से कहा, ‘शेयर बाजार केन्द्र में खंडित जनादेश मिलने के बजाय स्थिरता, निरंतरता और मजबूती नेतृत्व की उम्मीद कर रहा था. मजबूत सरकार के सत्ता में आने से निवेशकों की सुधारों के और मजबूती के साथ आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है.'

निफ्टी पहुंचेगा 13,000 तक!

उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले हम यह देखेंगे कि सरकार बजट में क्या करती है.' राव ने आने वाले दिनों में बाजार परिदृश्य को लेकर अपने अनुमान में कहा, ‘हमें उम्मीद है कि मार्च 2020 तक निफ्टी 12,500 और 13,000 के दायरे में होगा. तेजी के हालात बनने पर मार्च 2020 तक बाजार 13,000 से 13,500 के दायरे में पहुंच जाएगा.' उन्होंने कहा कि कोटक सिक्युरिटीज ने मार्च 2020 तक सेंसेक्स के 42,000 और 43,300 (औसतन 42,650 अंक) के दायरे में रहने का अनुमान लगाया है.

कच्चा तेल और ट्रेड वॉर पर भी रखें नजर

राव ने कहा, ‘राजनीतिक जनादेश अच्छा है, लेकिन मेरा मानना है कि देश और देश के बाहर कई मुद्दे हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है. अमेरिका- चीन के बीच ट्रेड वॉर सब जानते हैं, हमारा मानना है कि स्थानीय स्तर पर भी वृहद आर्थिक स्थिति में सुस्ती दिख रही है. कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है तो ठीक है, लेकिन इस सीमा से ऊपर यह यदि लंबे समय तक ठहरता है तो नुकसान पहुंचाएगा. विदेशी संस्थागत निवेशकों का प्रवाह सकारात्मक है और हमारा मानना है कि भारतीय बाजारों में निवेश आएगा.

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मोदी सरकार से उम्मीदों के बारे में राव ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि सरकार आर्थिक वृद्धि और निवेश में फिर से तेजी लाने पर ध्यान दें. वृहद स्तर पर आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. इसमें सरकार की तरफ से वित्तीय प्रोत्साहन की जरूरत है, लेकिन इसकी गुंजाइश सीमित लगती है, क्योंकि राजकोषीय घाटा ऊंचा बना हुआ है. बहरहाल, मौद्रिक प्रोत्साहन की गुंजाइश बनी हुई है. ब्याज दरों में कटौती, सरकारी बॉन्ड के लिए एफपीआई सीमा बढ़ाने और बैंकिंग प्रणाली में पूंजी डालने से स्थिति में सुधार लाया जा सकता है.'  

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