पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में धीरे-धीरे रौनक लौट रही है. कारोबार के आखिरी घंटे में ऑटो और मेटल शेयरों में तेजी की वजह से सेंसेक्स 323 अंक बढ़कर 36,981 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी भी 98.30 अंक की तेजी के साथ 10,946.20 के स्तर पर रहा.
कारोबार के अंत में टेक महिंद्रा और मारुति के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी रही. इसी तरह एनटीपीसी, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक और बजाज ऑटो के शेयर भी 3 फीसदी से अधिक बढ़त के साथ बंद हुए. टाटा मोटर्स, महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, कोटक बैंक, हीरो मोटोकॉर्प, वेदांता और पावरग्रिड के शेयर में भी 2 फीसदी से अधिक की तेजी रही. इस बीच, यस बैंक, सनफार्मा, एसचीएल और टीसीएस के शेयर लाल निशान पर बंद हुए.इस बीच, शुक्रवार को कारोबार में रुपया 28 पैसे मजबूत 71.84 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया. गुरुवार को रुपया 28 पैसे की बढ़त लेकर 71.84 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
भेल को मिला कॉन्ट्रैक्ट, शेयर में तेजी
सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी भेल के शेयर में करीब 1.17 फीसदी की तेजी आई. कंपनी के शेयर 51.75 रुपये के भाव पर पहुंच गए. दरअसल, भेल को छत्तीसगढ़ में भिलाई बिजली परियोजना के विस्तार के लिए 450 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है. भेल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, "450 करोड़ रुपये का यह कॉन्ट्रैक्ट एनटीपीसी - सेल पावर कंपनी की ओर पेश किया गया है. यह कंपनी एनटीपीसी और सेल का ज्वाइंट वेंचर है. " इस कॉन्ट्रैक्ट में भेल के काम का दायरा डिजायन तैयार करना, इंजीनियरिंग, सिविल कार्य, आपूर्ति, स्थापना और उसे चालू करने का है.
Prabhat Dairy में रौनक
कारोबार के दौरान Prabhat Dairy के शेयरों में 20 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और इस वजह से अपर सर्किट लगकर 78.15 रुपये पर पहुंच गया. दरअसल, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स 10 सितंबर को स्वैच्छिक तौर पर कंपनी के शेयरों को डिलिस्ट कराने का फैसला करेंगे. कंपनी के प्रमोटर 4.8 करोड़ शेयर यानी 49.90 फीसदी हिस्सेदारी शेयरहोल्डर्स से खरीदना चाहते हैं. फिलहाल उनके पास कंपनी की 50.1 फीसदी हिस्सेदारी है.
इंडियाबुल्स हाउसिंल फाइनेंस को नुकसान
कारोबार के दौरान इंडियाबुल्स हाउसिंल फाइनेंस के शेयर 10 फीसदी गिर गए. यह कंपनी का पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला लेवल है. कारोबार के अंत में शेयर करीब 5 फीसदी लुढ़क कर बंद हुए. कंपनी को नुकसान की वजह इसके प्रमोटर्स का कानूनी विवाद है. प्रमोटर्स पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी के फंड का गलत इस्तेमाल किया है.