बातचीत के दौरान कॉल कटने (काल ड्रॉप) की समस्या को लेकर बढती चिंताओं के बीच दूरसंचार नियामक ट्राई ने कहा है कि दिल्ली व मुंबई की ज्यादातर दूरसंचार कंपनियां इस बारे में तय मानकों का पालन नहीं कर रही हैं.
नियमों के हिसाब से काल ड्रॉप की दर दो प्रतिशत से कम होनी चाहिए. ट्राई ने दूरसंचार कंपनियों की सेवाओं की गुणवत्ता की अपनी आडिट के निष्कर्ष आज जारी किए. एक एजेंसी ने जून व जुलाई के दौरान उक्त दो शहरों में स्वतंत्र परीक्षणों के जरिए सेवाओं की गुणवत्ता की आडिट की थी.
ट्राई के परीक्षण में आए कॉल ड्रॉप के आंकड़े
मुंबई में आइडिया की काल ड्रॉप दर 5.56 फीसदी, टाटा की 5.51 फीसदी, वोडाफोन की 4.83 फीसदी, एयरसेल की 3.19 फीसदी, रिलायंस की 2.29 फीसदी रही. केवल एयरटेल मानकों पर खरी उतरी और उसकी काल ड्रॉप दर 0.97 फीसदी रही.
दिल्ली में रिलायंस की काल ड्रॉप दर 17.29 फीसदी, एयरटेल की काल ड्रॉप दर 8.04 फीसदी, एयरसेल 5.18 फीसदी, वोडाफोन की 4.28 फीसदी व आइडिया की काल ड्रॉप दर 2.84 फीसदी रही. दिल्ली में टाटा ने 0.84 प्रतिशत काल ड्रॉप दर के साथ मानकों का पालन किया.
ट्राई के अनुसार इस परीक्षण के परिणामों से पता चलता है कि ज्यादातर कंपनियां नेटवर्क से सम्बद्ध मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं. उंची काल ड्राप दर, उंची ब्लाक काल दर, निम्न काल सैटअप सफलता दर व खराब आरएक्स गुणवत्ता के चलते ये कंपनियां मानकों का पालन करने में विफल रही हैं.