वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज लोकसभा में मोदी सरकार का पहला आम बजट पेश करते हुए समाज के हर तबके को खुश करने की कोशिश की. वित्त मंत्री ने आयकर में राहत दी तो देश के किसानों की दशा सुधारने के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया. बजट भाषण में लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के घोषणापत्र में किए गए वादों की झलक भी साफ दिखी. महंगाई के मसले पर जेटली ने कहा कि पहले 45 दिन में सरकार से बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती, महंगाई पर काबू करने की कोशिश जारी है.
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मोदी सरकार के पहले बजट में करीब हर वर्ग का ध्यान रखा गया है. इसमें राजकोषीय घाटे को कम करने और देश की आर्थिक वृद्धि को फिर से पटरी पर लाने के साथ साथ देश की आंतरिक और सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के प्रयास किए गए हैं.
बजट में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर ध्यान दिया गया है वहीं जम्मू-कश्मीर के विस्थापितों के कल्याण के लिए भी प्रावधान किया गया है. नौकरीपेशा के अलावा सेना के लोगों के कल्याण का भी सरकार ने आम बजट में ख्याल रखा है.
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वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आज पेश किए आम बजट में जहां वेतनभोगी वर्ग के लिए आयकर छूट की सीमा बढ़ाई गई है, वहीं निवेश पर छूट की सीमा में भी इजाफा किया गया है. महिलाओं और बच्चों को सुविधाओं पर विशेष जोर, विश्वस्तरीय शहरों का निर्माण, वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण तथा नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना गंगा की धारा को अविरल बनाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है.
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वित्त मंत्री ने सुविधा संपन्न लोगों को ज्यादा राहत नहीं दी लेकिन मिडिल क्लास के लोगों को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया है. सरकार ने इनकम टैक्स में राहत तो दी लेकिन इसमें बुजुर्गों और महिलाओं के कल्याण पर खास जोर दिया. सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एफडीआई की सीमा 49 फीसदी तक बढ़ा कर यह संकेत दिया कि वो युवाओं को रोजगार देने के लिए काम करने के मूड में है. जेटली ने यह भी कहा कि योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी.
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मोदी सरकार शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में भी सुधार करने की दिशा में कदम उठा रही है. बजट में एम्स, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों की तादाद बढ़ाने की घोषणा की गई. हालांकि, बजट के दौरान कुछ ऐसी घोषणाएं की गईं जिनसे लगा कि मोदी भी अब मायावती की राह पर चलने की तैयारी में हैं. वित्त मंत्री जेटली ने सरदार पटेल की प्रतिमा बनाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पेश किया.
मायावती की राह पर अरुण जेटली!
क्या यह सबसे लंबा बजट भाषण था?
मोदी सरकार का पहला बजट अरुण जेटली ने पढ़ा और उसके साथ ही यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि क्या यह अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण था? जानकारों की मानें तो यह अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण था और इसमें 16,536 शब्द थे.
समझा जाता है कि यशवंत सिन्हा का 2002-03 का बजट भाषण अब तक का सबसे लंबा (15,882 शब्द) भाषण था, लेकिन इसने उसे भी पीछे छोड़ दिया है. देश का सबसे पहला बजट भाषण महज 39 पैराग्राफ का था जो बढ़ते-बढ़ते इस लंबाई तक जा पहुंचा. पूर्व वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी का 2012 का बजट भाषण तो 229 पैराग्राफ का था.
समय के मामले में इसके पहले पूर्व वित्त मंत्री मनमोहन सिंह का 1991 का बजट भाषण दो घंटे से भी ज्यादा समय का था और उसने ही देश में आर्थिक उदारीकरण की शिला रखी थी. अरुण जेटली का बजट भाषण दो घंटे से भी ज्यादा समय तक चला और उन्होंने कई मुद्दों पर बातें की. उनकी सरकार का यह पहला बजट था और इसलिए लोगों ने उसे बहुत ध्यान से सुना.