भारत के 'एचडीएफसी बैंक' में चीन के पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) द्वारा कथित रूप से हिस्सेदारी खरीदने पर रविवार को सोशल मीडिया पर जमकर हंगामा हुआ. इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक को ट्वीट कर यह कहना पड़ा कि सरकार भारतीय कंपनियों को विदेशी हाथों में जाने से रोके. आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला और इसमें कितनी है सच्चाई.
असल में चीन के केंद्रीय बैंक पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने भारत की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचडीएफसी) में मार्च तिमाही में कुल 1.01 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है.
एचडीएफसी बैंक नहीं, यह अलग कंपनी है
असल में एचडीएफसी बैंक और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचडीएफसी) अलग कंपनियां हैं. एचडीएफसी असल में एचडीएफसी बैंक की मूल कंपनी है, लेकिन अब दोनों अलग-अलग कॉरपोरेट ईकाई हैं. एचडीएफसी में शेयर खरीदने का मतलब यह नहीं कि एचडीएफसी बैंक में किसी ने हिस्सेदारी खरीदी है. इसलिए इस मामले में सोशल मीडिया पर जताई जा रही चिंता बेवजह और जानकारी के अभाव में है.
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सिर्फ 1.01 फीसदी है हिस्सेदारी
बीएसई को दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष की अंतिम यानी मार्च तिमाही में चीन के केंद्रीय बैंक की एचडीएफसी में हिस्सेदारी 1.75 करोड़ शेयरों की हो गई. हालांकि एचडीएफसी में मार्च 2019 तक भी पीबीओसी की 0.8 फीसदी हिस्सेदारी थी. इसका मतलब यह है कि एक साल में चीनी बैंक की एचडीएफसी में हिस्सेदारी महज 0.21 फीसदी बढ़ी है. यह शेयर बढ़ने के बाद भी एचडीएफसी में चीनी केंद्रीय बैंक की हिस्सेदारी महज 1.01 फीसदी है.
गौरतलब है कि एचडीएफसी में पहले से ही कई विदेशी कंपनियों या संस्थाओं की इससे ज्यादा हिस्सेदारी है. इनमें इनवेस्को ओपनहीमर डेवलपिंग मार्केट फंड (3.33 फीसदी), सिंगापुर सरकार (3.23 फीसदी) और वैनगॉर्ड टोटल इंटरनेशनल स्टॉक इंडेक्स फंड (1.74 फीसदी) शामलि हैं.
भारत के बड़े हिस्सेदारों की बात करें तो आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की इसमें 1.20 फीसदी हिस्सेदारी है. इसमें सबसे बड़ी (कुल 9.52 फीसदी) हिस्सेदारी 37 म्यूचुअल फंडों की है. हर तिमाही के बाद लिस्टेड कंपनियों को एक्सचेंज को यह जानकारी देनी होती है कि उसके शेयरधारकों में 1 फीसदी से ज्यादा शेयर किसके हैं.
सोशल मीडिया पर हंगामा बरपा
इस खबर के आते ही रविवार को सोशल मीडिया पर खूब हंगामा काटा गया. इतनी ज्यादा चर्चा होने लगी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन को ट्वीट कर पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से यह अनुरोध करना पड़ा कि वे भारतीय संस्थाओं का स्वामित्व विदेशी हाथों में न जानें दें.
इस बारे में ज्यादातर लोगों को भ्रम रहा कि चीनी बैंक ने एचडीएफसी बैंक की हिस्सेदारी खरीदी है. बॉलीवुड एक्टर एजाज खान ने ट्वीट कर कहा कि एचडीएफसी बैंक में चीन के केंद्रीय बैंक ने हिस्सेदारी खरीद ली है.
Central bank of China took the benefit of pandemic and bought 2977 Crore worth HDFC Bank shares. Government of India should take preventive measures and avoid foreign government investments in key sectors.
— Ajaz Khan (@AjazkhanActor) April 12, 2020
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राहुल गांधी ने क्या कहा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार शाम को इस बारे में ट्वीट कर कहा कि देश में आर्थिक सुस्ती से भारतीय कॉरपारेट कंपनियां काफी कमजोर हुई हैं, इसी वजह से वे टेकओवर के लिए निशाना बन रही हैं. सरकार को इसकी इजाजत नहीं देनी चाहिए कि कोई विदेशी कंपनी इस संकट के दौर में किसी भारतीय कंपनी पर अधिकार हासिल करे.
The massive economic slowdown has weakened many Indian corporates making them attractive targets for takeovers. The Govt must not allow foreign interests to take control of any Indian corporate at this time of national crisis.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 12, 2020
स्वदेशी जागरण मंच ने क्या कहा
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने भी ट्वीट कर पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से यह अनुरोध किया कि वे भारतीय संस्थाओं का स्वामित्व विदेशी हाथों में न जानें दें.
China profiteering from #ChineseVirus HDFC shares cornered by #PeoplesBankOfChina Dear PM @narendramodi ji, investigate and don’t allow our institutions to go out of Indian hands. @nsitharaman @ashokatluri pic.twitter.com/aFY24LE8WE
— ASHWANI MAHAJAN (@ashwani_mahajan) April 12, 2020
बड़ी गिरावट का उठाया फायदा
असल में कमजोर सेंटिमेंट की वजह से मार्च तिमाही में एचडीएफसी के शेयरों में 32.29 फीसदी की गिरावट आई है. गुरुवार को कारोबार बंद होने तक एचडीएफसी के शेयर करीब 1702 रुपये पर बंद हुए. जनवरी में इस शेयर का कारोबार 2500 रुपये के आसपास चल रहा था.