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कच्चे तेल समेत इन वजहों से आई रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट

पिछले कुछ दिनों से रुपये में जारी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. गुरुवार को रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. कच्चे तेल और डॉलर की डिमांड बढ़ने की वजह से रुपया लगातार कमजोर हो रहा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (Getty Images)
प्रतीकात्मक तस्वीर (Getty Images)

पिछले कुछ दिनों से रुपये में जारी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. गुरुवार को रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. कच्चे तेल और डॉलर की डिमांड बढ़ने की वजह से रुपया लगातार कमजोर हो रहा है.

इस कारोबारी हफ्ते के चौथे दिन डॉलर के मुकाबले रुपया 28 पैसे गिरकर 68.89 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला है. शुरुआती कारोबार में रुपये में गिरावट बढ़ गई है. फिलहाल एक डॉलर के मुकाबले रुपया 69.09 के स्तर पर पहुंच गया है. रुपये में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है.

इससे पहले बुधवार को रुपया 19 महीने में सबसे ज्यादा कमजोर हुआ था. इस कारोबारी हफ्ते के तीसरे दिन रुपये में 30 पैसे की गिरावट दर्ज की गई.

इस गिरावट के साथ यह एक डॉलर के मुकाबले  68.54 के स्तर पर खुला. नवंबर, 2016 के बाद यह पहली बार था, जब रुपया डॉलर के मुकाबले इतना नीचे गिरा. रुपये में जारी गिरावट के लिए कई वजहें हैं.

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कच्चा तेल:

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का दौर जारी है. बुधवार को कच्चा तेल नवंबर 2014 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 77.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा है. इसके अलावा डब्लूटीआई क्रूड भी 72.54 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है. कच्चे तेल में जारी उथल-पुथल का असर भी रुपये पर दिख रहा है.  

चालू खाता घाटा

रुपये में गिरावट का दूसरा बड़ा कारण चालू खाता घाटा में बढ़ोतरी भी है. जेपी मॉर्गन ने अपने एक नोट में 19 जून को कहा था कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. भारत के मामले में बात करें, तो वित्त वर्ष 2019 में चालू खाता घाटा जीडीपी के 2.5 फीसदी की दर से बढ़ने की आशंका है. इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

डॉलर की बढ़ती डिमांड:

अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की डिमांड में आ रही बढ़ोतरी भी रुपये में गिरावट की एक वजह बन रही है. निर्यातकों के बीच डॉलर की डिमांड बढ़ी है, जिसका असर रुपये पर देखने को मिल रहा है.

बैंकर्स और आयातक जैसे कि ऑयल रिफाइनर्स की तरफ से लगातार डॉलर की डिमांड बढ़ रही है. गिरता रुपया और कच्चे तेल में आ रही तेजी भारत के लिए अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर नई  परेशानी खड़ी कर सकता है.

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