Oxfam की एक रिपोर्ट से दुनिया में घोर असमानता का भयावह चेहरा सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के टॉप 22 सुपर रिच मर्दों के पास जितनी धन-संपदा (Wealth) है, उतना तो पूरे अफ्रीका महाद्वीप में रहने वाली समूची महिलाओं के पास भी नहीं है.
WEF से पहले जारी हुई स्टडी
गौरतलब है कि अफ्रीका में महिलाओं की संख्या करीब 67 करोड़ है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की 50वीं सालाना बैठक से पहले Oxfam द्वारा जारी एक स्टडी 'टाइम टु केयर' में यह भी बताया गया है कि दुनिया के सिर्फ 2,1543 बिलियनरीज के पास दुनिया की 60 फीसदी जनसंख्या (4.6 अरब लोगों) से ज्यादा संपदा यानी वेल्थ है.
स्विट्जरलैंड के शहर दावोस में सोमवार से शुरू वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान आय और लैंगिक असमानता के सवालों को प्रमुखता से उठाया जा सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है, उनका (टॉप अमीरों) धन पहले से ही बहुत ज्यादा है. हमारी अर्थव्यवस्था इस तरह की है कि कुछ हाथों में ज्यादा से ज्यादा धन जा रहा है.' रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में दुनिया में अरबपतियों (डॉलर में) की संख्या दोगुनी हो गई है और अब 22 सबसे धनी मर्दों के पास जितना धन है, उतना पूरे अफ्रीका की महिलाओं के पास भी नहीं है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिलाएं हर दिन करीब 12.5 अरब घंटे का काम मुफ्त में करती हैं और यह साल में करीब 10.8 ट्रिलियन डॉलर की कीमत के बराबर है.
दुनिया के गरीबों से ज्यादा धन सिर्फ 2,153 अरबपतियों के पास
ऑक्सफेम के आंकड़े फोर्ब्स मैगजीन और स्विट्जरलैंड के क्रेडिट सुइस बैंक के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, हालांकि कई इकोनॉमिस्ट इन पर सवाल भी खड़े करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 2,153 अरबपतियों के पास जितनी संपदा है वह पूरी दुनिया के 4.6 अरब सबसे गरीब लोगों से भी ज्यादा है.
ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बहर ने कहा, 'जब तक सरकारें असमानता दूर करने वाली नीतियों पर जोर नहीं देतीं, अमीरों और गरीबों के बीच की खाई को दूर नहीं किया जा सकता.'
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भी अमीरों और गरीबों के बीच जबरदस्त असमानता बनी हुई है. भारत के सिर्फ 1 फीसदी अमीरों के पास देश की कुल जनसंख्या के 70 फीसदी यानी 95.3 करोड़ लोगों के पास मौजूद कुल धन का चार गुना ज्यादा धन है. यही नहीं, भारतीय बिलियनरीज (डॉलर में अरबपति) के पास जितनी कुल संपदा है वह केंद्र सरकार के एक साल के कुल बजट से भी ज्यादा है.
क्या है रिपोर्ट की और प्रमुख बातें
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय महिलाएं और लड़कियां हर दिन परिवार या अन्य लोगों की देखभाल में बिना एक पैसा लिए 3.26 अरब घंटे का काम करती हैं. यह भारतीय अर्थव्यवस्था में सालाना 19 लाख करोड़ रुपये के योगदान के बराबर है, जो कि भारत सरकार के शिक्षा बजट (93,000 करोड़ रुपये) का करीब 20 गुना है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत के जीडीपी के 2 फीसदी तक इकोनॉमी में सीधे सार्वजनिक निवेश किया जाए तो हर साल 1.1 करोड़ नौकरियों का सृजन हो सकता है.