भारत में बैंकों की सावधि जमा योजनाएं (FD) लोगों के लिए अपनी गाढ़ी कमाई से होने वाली बचत को जमा करने का सबसे लोकप्रिय रास्ता मानी जाती हैं. लेकिन हाल के दिनों में इन पर ब्याज काफी घट जाने और महंगाई बढ़ जाने से वास्तविक रिटर्न निगेटिव हो गया है यानी लोगों को नुकसान हो रहा है. आइए जानते हैं कि एफडी के विकल्प में पैसा जमा करने के अन्य रास्ते क्या हैं?
उदाहरण के लिए भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी के पांच साल तक के एफडी पर आपको 5.30 फीसदी का ब्याज मिलता है. अगर कोई 30 फीसदी के टैक्स दायरे में आता है तो उसे इस कमाई पर 1.59 फीसदी ब्याज देना होगा और इस तरह उसका प्रभावी रिटर्न महज 3.71 फीसदी रह जाता है. महंगाई करीब 5 फीसदी हो गई है, तो इस तरह से महंगाई के हिसाब से देखें तो ऐसे एफडी में पैसा जमा करने वाले को करीब 1.29 फीसदी का नुकसान हो रहा है यानी उसे निगेटिव रिटर्न मिल रहा है. यही हाल अन्य बैंकों के एफडी का भी है.
क्या हैं विकल्प: ऐसे में लोग एफडी की जगह किसी दूसरे साधनों में पैसा जमा करने को सोचने लगे हैं. निवेश मामलों के जानकार बलवंत जैन कहते हैं कि एफडी की जगह पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम (POMIS), सीनियर सिटीजन स्कीम, एनएससी में पैसा लगाया जा सकता है. म्यूचुअल फंड भी बेहतर रिटर्न का अच्छा साधन हैं. लेकिन यह बात ध्यान रखनी होगी कि म्यूचुअल फंडों में भी अक्सर एक या दो साल में निगेटिव रिटर्न ही मिलता दिखा है. इनमें भी आपको पांच साल या उससे लंबी अवधि के लिए पैसा लगाने पर बढ़िया रिटर्न मिलता है.
पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): POMIS लॉन्ग टर्म का एक निवेश साधन है जिसमें आपको पांच साल तक पैसा लगाना होता है. इसमें सिंगल ओनरशिप पर 4.5 लाख रुपये और जॉइंट ओनरशिप पर अधिकतम 9 लाख रुपये जमा किया जा सकता है. इस पर सालाना 6.6 फीसदी का ब्याज मिलता है और ब्याज का भुगतान हर महीने होता है.
रिजर्व बैंक फ्लोटिंग रेट सेविंग बॉन्ड: रिजर्व बैंक का फ्लोटिंग रेट सेविंग बॉन्ड भी लॉन्ग टर्म का निवेश साधन है. इसमें सात साल तक की मैच्योरिटी अवधि होती है. इस पर 7.15 फीसदी ब्याज मिलता है. इस पर मिलने वाले रिटर्न पर टैक्स लगता है. इनमें न्यूनतम 1,000 रुपये का निवेश किया जा सकता है, अधिकतम निवेश की सीमा नहीं है.
पांच साल का एनएससी: पांच साल की परिपक्वता अवधि वाली नेशनल सेविंग स्कीम (NSC) भी पोस्ट ऑफिस की एक लोकप्रिय बचत योजना है. यह भी निवेश का काफी सुरक्षित तरीका है. फिलहाल एनएससी पर करीब 6.8 फीसदी ब्याज मिल रहा है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें निवेश करने पर आपको इनकम टैक्स की धारा 80 सी के तहत टैक्स छूट भी मिलती है. लेकिन पांचवें साल में आपको जो ब्याज मिलती है उस पर टैक्स लगता है.
म्यूचुअल फंड: अच्छे रिटर्न के लिए म्यूचुअल फंड काफी लोकप्रिय निवेश साधन हैं. किसी अच्छे म्यूचुअल फंड में अगर आपने 3 से 5 साल तक पैसा लगा दिया तो आपको आसानी से 10 से 20 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है. लेकिन इसमें सचेत रहने की बात यह है एक से 2 साल की शॉर्ट अवधि में आपको म्यूचुअल फंडों पर निगेटिव रिटर्न मिल सकता है यानी घाटा हो सकता है. अगर आपने किसी टैक्स सेवर फंड में पैसा लगाया तो आप इसके बदले इनकम टैक्स की बचत भी कर सकते हैं.
कॉरपोरेट एफडी: निजी कंपनियों की सावधि जमा योजनाओं में अच्छा रिटर्न मिलता है. इन्हें कॉरपोरेट एफडी कहते हैं. ऐसी एफडी में आपको पांच साल में 8 से 10 फीसदी का बेहतर रिटर्न मिल सकता है. लेकिन एक चीज ध्यान रहे कि निजी कंपनियों के एफडी पर पैसा लगाने में थोड़ा जोखिम होता है, क्योंकि इसमें पैसा वापस देने की बैंकों की तरह सरकार की गारंटी नहीं होती. ऐसे एफडी की रेटिंग जारी होती है. ट्रिपल ए या उससे अच्छी रेटिंग वाले कॉरपोरेट एफडी में पैसा लगाना सुरक्षित माना जाता है.
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम: वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोस्ट ऑफिस का सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SSSC) भी निवेश का एक अच्छा विकल्प है. इसमें 7.4 फीसदी ब्याज मिलता है. ब्याज का भुगतान साल में चार बार किया जाता है. इसमें निवेश 1,000 रुपये या उसके गुणक में किया जा सकता है. अधिकतम निवेश 15 लाख रुपये तक हो सकता है.