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बैंक डूबने पर भी आपका पैसा रहेगा सेफ, सरकार के इस फैसले से 98% खाताधारक बेफिक्र!

बैंक में फर्जीवाड़े से खाताधारक परेशान
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पिछले कुछ वर्षों में बैंक फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आए, जिसके बाद खाताधारकों में हाहाकार मच गया. खासकर पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC), यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक में फर्जीवाड़े के मामले से खाताधारक चिंतित थे. गाढ़ी कमाई डूबने की आशंका से हर कोई परेशान था. (Photo: File)

कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला
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पिछले दिनों ग्राहकों में बैंकों को लेकर भरोसा थोड़ा डिगा. लोगों के मन में सवाल है कि अगर किसी कारणवश बैंक डूब जाता है तो फिर उस बैंक के खाताधारकों की जमापूंजी का क्या होगा? क्योंकि अभी तक जमाकर्ताओं द्वारा जमा की गई रकम पर 1 लाख रुपये तक का बीमा होता है. लेकिन अब सरकार ने खाताधारकों को बड़ी राहत दी है. (Photo: File)

DICGC एक्ट में बदलाव पर केंद्र की मुहर
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दरअसल बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल हुई बैठक में डिपॉजिट इंश्योरेंस ऐंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) एक्ट में बदलाव को मंजूरी दे दी गई. अब इसके बारे में बिल को संसद में रखा जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस बिल को मॉनसून सत्र के दौरान ही पेश किया जाएगा. इस बिल को कानूनी अमलीजामा पहनाने के बाद खाताधारकों को बैंक में अपनी जमापूंजी की सिक्योरिटी को लेकर चिताएं दूर हो जाएंगी. (Photo: File)
 

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तीन महीने के भीतर मिलेगा पैसा
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तीन महीने के भीतर मिलेगा पैसा

सबसे खास बात यह है कि इस कानून के बाद किसी बैंक के डूबने पर बीमा के तहत खाताधारकों को पैसा 90 दिन के भीतर मिल जाएगा. यानी तय समय के अंदर खाताधारकों को जमा राशि मिल जाएगी. मुश्किल में फंसे बैंक को पहले 45 दिनों में इंश्योरेंस कॉरपोरेशन को सौंपा जाएगा. रिजॉल्यूशन का इंतजार किए बिना 90 दिनों के अंदर प्रोसेस को पूरा कर लिया जाएगा. (Photo: File)

सभी तरह के खाते दायरे में 
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सभी तरह के खाते दायरे में 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि बैंक मोराटोरियम के तहत होने पर ही यह उपाय लागू होगा. यानी मोराटोरियम का सामना कर रहे बैंकों को भी राहत मिलेगी. बैंक के सभी डिपॉजिट DICGC के दायरे में आते हैं, जिसमें सेविंग्स, फिक्स्ड डिपॉजिट समेत करेंट अकाउंट शामिल हैं. साफ शब्दों में कहें तो सभी तरह के खातों में डिपॉजिट पर इंश्योरेंस की सुरक्षा मिलेगी. (Photo: File)

5 लाख रुपये तक जमा राशि की गारंटी 
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5 लाख रुपये तक जमा राशि की गारंटी 

अभी तक नियम यह था कि जमाकर्ताओं को 5 लाख रुपये का बीमा होने पर भी तब तक पैसा नहीं मिलेगा, जब तक रिजर्व बैंक कई तरह की प्रक्रियाएं नहीं पूरी करता. इसकी वजह से लंबे समय उन्हें एक पैसा नहीं मिलता. लेकिन एक्ट में बदलाव से ग्राहकों को 90 दिन के अंदर 5 लाख रुपये तक राशि मिल जाएगी. सभी बैंकों में किसी भी प्रकार के 5 लाख रुपये तक के डिपॉजिट पर इंश्योरेंस की सुरक्षा मिलेगी.

 कुल 98.3 फीसदी खाते सुरक्षित
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कुल 98.3 फीसदी खाते सुरक्षित

सरकार ने बताया कि इन नए बदलाव से सभी डिपॉजिट में से 98.3 फीसदी तक कवर हो जाएंगे. महज 1.7 फीसदी खाते इस इंश्योरेंस के दायरे में नहीं आएंगे. सीतारमण ने बताया कि डिपॉजिट की वैल्यू के लिहाज से यह 50 फीसदी से अधिक कवरेज होगी. यानी बैंक में जितनी जमा राशि है, उसमें आधी राशि बीमा में कवर है. (Photo: Getty Images)

27 साल पहले बदला था कानून 
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27 साल पहले बदला था कानून 
दरअसल, केंद्र सरकार ने इससे पहले डिपॉजिट इंश्योरेंस में 27 साल पूर्व 1993 में बदलाव किया था. तब से बैंक में जमा एक लाख रुपये तक की राशि की गारंटी थी. ताजा फैसला 4 फरवरी 2020 से लागू होगा. यानी PMC, लक्ष्मी विलास बैंक और यस बैंक के ग्राहकों को भी इसका फायदा मिलेगा. इसके तहत कमर्श‍ियली ऑपरेटेड सभी बैंक आएंगे. ग्रामीण बैंक भी दायरे में आएंगे. (Photo: File)

एक से अधिक खाते पर यह नियम 
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एक से ज्यादा अधिक खाते पर यह नियम 

डिपॉजिट इंश्योरेंस के नए नियम के मुताबिक ग्राहक के कुल 5 लाख रुपये इस इंश्योरेंस के दायरे में आएंगे. अगर ग्राहक का एक ही बैंक की कई ब्रांच में खाते हैं, तो सभी अकाउंट में डिपॉजिट अमाउंट और ब्‍याज जोड़कर 5 लाख तक की राशि ही सुरक्षित मानी जाएगी. इसमें डिपॉजिट फंड और ब्‍याज दोनों शामिल होंगे. (Photo: File)

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DICGC के बारे में 
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DICGC के बारे में 
DICGC असल में भारतीय रिजर्व बैंक का सब्सिडियरी है और यह बैंक जमा पर बीमा कवर उपलब्ध कराता है. वित्त मंत्री ने बताया खातों की इश्योरेंस के लिए प्रीमियम बैंक देता है, इसे ग्राहक से नहीं वसूला जाता है. अभी बैंक 100 रुपये की डिपॉजिट पर 12 पैसे का प्रीमियम भरता है. इस नए कानून से सहकारी बैंकों के जमाकर्ता सबसे बड़े लाभार्थी होंगे.   

ग्राहकों का बढ़ेगा विश्वास 
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ग्राहकों का बढ़ेगा विश्वास 
गारंटी राशि 1 लाख से बढ़कर 5 लाख रुपये होने पर और 90 दिन के अंदर 5 लाख तक जमा राशि मिलने की सुरक्षा गारंटी से अब लोग बैंकों में गारंटी राशि के बराबर पैसा जमा कराने से नहीं हिचकेंगे. यही नहीं, इससे लोगों का बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा और बढ़ेगा. नतीजतन, सेविंग बढ़ने से बैंक ज्यादा कर्ज दे सकेंगे. 

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